Bulandshahr News: नाबालिग छात्रा के अपहरण और दुष्कर्म के आठ साल पुराने मामले में अदालत ने तीन दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम) मनोज कुमार सिंह की अदालत ने मुख्य आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, वारदात में सहयोग करने वाले उसके दो साथियों को भी तीन-तीन साल की जेल की सजा दी गई है। इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने न्याय मिलने पर राहत की सांस ली है।
पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी
नरौरा थाना क्षेत्र में 6 दिसंबर 2017 को एक व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी, जो उस समय कक्षा 12 की छात्रा थी, को आरोपियों ने बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस की विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि मुख्य आरोपी सचिन कुमार ने किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था।
पॉक्सो एक्ट में 10 साल के कठोर कारावास
वहीं, जांच में यह भी सामने आया कि कपिल उर्फ आशु और हरिदर्शन ने छात्रा को घर से भगाने और इस जघन्य अपराध को छिपाने व अंजाम देने में सचिन की पूरी मदद की थी। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को पर्याप्त पाते हुए तीनों को दोषी करार दिया। मुख्य आरोपी सचिन कुमार को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में 10 साल के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं, सहयोगी कपिल उर्फ आशु और हरिदर्शन को तीन-तीन वर्ष के कारावास और तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।