Rare Birds Return to Rajasthan's forests:राजस्थान के जैसलमेर से वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। करीब एक दशक से चल रहे संरक्षण कार्यक्रम के बाद दो नर ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को डेजर्ट नेशनल पार्क के जंगल में छोड़ा गया है। यह कदम इसलिए खास है क्योंकि इस पक्षी की संख्या देश में काफी कम रह गई है और इसे बचाने के लिए लंबे समय से कोशिशें की जा रही हैं।
जंगल में वापस लाने की शुरू हुई कोशिश
इन पक्षियों को पहले संरक्षण केंद्र में सुरक्षित तरीके से पाला गया। वैज्ञानिकों और वन विभाग की टीम ने इनके प्रजनन और देखभाल पर लगातार काम किया। अब संरक्षण केंद्र में पले पक्षियों को धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक घर में वापस लाने की शुरुआत की गई है। दो पक्षियों को जंगल में छोड़ना इसी लंबे अभियान का अगला कदम है। इससे विशेषज्ञों को यह समझने में भी मदद मिलेगी कि ये पक्षी प्राकृतिक वातावरण में किस तरह रहते और आगे बढ़ते हैं।
संरक्षण केंद्र में बढ़ रही पक्षियों की संख्या
सरकार के अनुसार जैसलमेर के सम और रामदेवरा स्थित संरक्षण केंद्रों में फिलहाल 97 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड हैं। इनमें 57 पक्षी संरक्षण केंद्र में पैदा हुए हैं, जबकि 40 अंडों से जुड़े हैं जिन्हें जंगल से लाया गया था। साल 2025 में 24 चूजे और 2026 में 29 चूजे पैदा हुए। इससे इस संरक्षण अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।
जंगल को भी बनाया जा रहा है सुरक्षित
सिर्फ पक्षियों को पालना ही इस अभियान का हिस्सा नहीं है। राजस्थान वन विभाग डेजर्ट नेशनल पार्क में उनके रहने और प्रजनन के लिए घास वाले इलाकों को भी सुरक्षित बना रहा है। करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में घासभूमि को सुरक्षित करने के लिए बाड़ लगाने का काम किया गया है। लंबे समय की निगरानी से इन इलाकों को पक्षियों के लिए अच्छे प्रजनन क्षेत्र के रूप में पहचाना गया है।
क्यों खास है यह सफलता
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को बचाने की कोशिश सिर्फ एक पक्षी को बचाने तक सीमित नहीं है। यह राजस्थान के प्राकृतिक वातावरण और जैव विविधता के लिए भी महत्वपूर्ण है। दो पक्षियों को जंगल में वापस छोड़ना करीब एक दशक की मेहनत के बाद हासिल हुई बड़ी उपलब्धि है। आने वाले समय में इनके व्यवहार और जंगल में रहने की क्षमता को देखा जाएगा। इसी अनुभव के आधार पर आगे और पक्षियों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की योजना को बेहतर बनाया जा सकेगा।
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