RSS Centenary Celebration
: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने 101 साल पूरे होने के मौके पर नागपुर में विजयादशमी का खास कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी। दशहरे के दिन होने वाला यह कार्यक्रम संघ के लिए खास महत्व रखता है। इस बार आयोजन में संघ की 101 साल की यात्रा और उसकी पुरानी परंपराओं की झलक देखने को मिली।
मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा
नागपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने पारंपरिक तरीके से शस्त्र पूजा की। संघ में दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इस पूजा को साहस, अनुशासन और अपनी जिम्मेदारी को समझने से जोड़कर देखा जाता है। हर साल विजयादशमी पर संघ के स्वयंसेवक एक साथ जुटते हैं और इस परंपरा को आगे बढ़ाते हैं। इस बार संघ के 100 साल पूरे होने के कारण कार्यक्रम पर खास ध्यान रहा।
संस्थापक हेडगेवार को दी श्रद्धांजलि
शस्त्र पूजा से पहले मोहन भागवत नागपुर स्थित स्मृति मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। हेडगेवार ने साल 1925 में नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। विजयादशमी का दिन संघ के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि इसी दिन संगठन की शुरुआत हुई थी। यही वजह है कि हर साल इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
दशहरे पर पथ संचलन की भी परंपरा
विजयादशमी के मौके पर संघ देश के कई हिस्सों में पथ संचलन भी आयोजित करता है। इसमें स्वयंसेवक एक साथ कदम मिलाकर चलते हैं। संघ के कार्यक्रमों में अनुशासन, संगठन और सांस्कृतिक परंपराओं पर जोर दिया जाता है। नागपुर में होने वाला वार्षिक उत्सव संघ के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। इस दौरान स्वयंसेवक अपनी परंपराओं को याद करते हैं और संगठन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
101 साल पूरे होने पर खास रहा आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना साल 1925 में हुई थी। इस तरह 2025 में संगठन ने अपने 101 साल पूरे किए और शताब्दी से जुड़े कार्यक्रमों का सिलसिला आगे बढ़ा। 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजा और संस्थापक को श्रद्धांजलि देना मुख्य आकर्षण रहा। इस आयोजन के जरिए संघ ने अपनी पुरानी परंपराओं को फिर से सामने रखा। नागपुर का यह कार्यक्रम संगठन की लंबी यात्रा और विजयादशमी से उसके जुड़ाव को दिखाता है।