Sikh Pilgrims India : पाकिस्तान में 104 सिख श्रद्धालुओं को भारत आने से पहले बड़ा झटका लगा है। ये श्रद्धालु श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए भारत पहुंचने वाले थे, लेकिन एयरपोर्ट पर उन्हें फ्लाइट में सवार होने की अनुमति नहीं मिली। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके पास वैध पासपोर्ट और भारतीय वीजा मौजूद था, फिर भी अंतिम समय में उन्हें रोक दिया गया। इस घटना के बाद यात्रियों में नाराजगी देखी गई और कई लोगों ने इसे धार्मिक यात्रा में बाधा बताया।
एयरपोर्ट पर क्या हुआ?
जानकारी के अनुसार सभी श्रद्धालु दुबई के रास्ते भारत जाने की तैयारी में थे। एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों ने उनसे अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी मांगा। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें पहले कभी ऐसी शर्त के बारे में नहीं बताया गया था। इसी कारण उन्हें फ्लाइट में बैठने की मंजूरी नहीं मिली और उनकी यात्रा बीच में ही रुक गई।
वीडियो में छलका दर्द
घटना के बाद कुछ श्रद्धालुओं के वीडियो भी सामने आए हैं। इनमें यात्रियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक श्रद्धालु ने कहा कि जब भारतीय वीजा पहले से जारी हो चुका है तो अतिरिक्त एनओसी की मांग समझ से परे है। यात्रियों का कहना है कि वे किसी सरकारी काम से नहीं बल्कि धार्मिक यात्रा के लिए जा रहे थे। इसलिए उन्हें रोका जाना उचित नहीं है।
आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा
वाघा-अटारी सीमा बंद होने के कारण श्रद्धालुओं ने दुबई होकर भारत आने का विकल्प चुना था। यह यात्रा पहले से ही महंगी थी। एयरपोर्ट पर रोके जाने के कारण कई यात्रियों की फ्लाइट छूट गई। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने यात्रा की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन आखिरी समय में हुई कार्रवाई ने सारी योजनाएं बिगाड़ दीं।
श्रद्धालुओं की मांग
यात्रियों ने मांग की है कि उन्हें भारत आने के लिए आसान व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि अगर हवाई मार्ग में दिक्कत है तो वाघा-अटारी सीमा के जरिए आने की अनुमति दी जानी चाहिए। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह केवल यात्रा का विषय नहीं बल्कि उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। इसलिए इस समस्या का जल्द समाधान होना चाहिए।
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अब आगे क्या होगा?
घटना के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। श्रद्धालु अब आगे की कार्रवाई और अनुमति का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल उनकी यात्रा अधूरी रह गई है और कई लोग अपने धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर चिंतित हैं। आने वाले दिनों में संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या फैसला लिया जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।