AIIMS Bilaspur: मेडिकल इमरजेंसी में एक-एक सेकंड बेहद कीमती होता है। एक-एक सेकंड जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय करती है। अक्सर आपने देखा होगा जब भी मरीज को किसी छोटे अस्पताल से AIIMS जैसे बड़े संस्थान में रेफर किया जाता है, जो सबसे ज्यादा समय सिर्फ कागजी कार्रवाई और पुरानी रिपोर्ट्स को समझने में लगता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के AIIMS बिलासपुर ने एक ऐसी तकनीक की शुरुआत की है, जो रेफर होने वाले मरीजों की जान बचाने में मील का पत्थर साबित होगी।
कौन है इसका इन्वेन्टर?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस लाइफ-सेविंग सिस्टम को किसी बड़े वैज्ञानिक ने नहीं, बल्कि 9वीं क्लास में पढ़ने वाले 14 साल के छात्र दर्श वर्मा ने तैयार किया है। आपको बता दें कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का नाम 'आपात सेतु' (Aapat Setu) है। इसे AIIMS बिलासपुर के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. दिनेश वर्मा के 14 साल के बेटे दर्श वर्मा ने अपनी कोडिंग और सूझबूझ से डेवलप किया है। दर्श ने स्वास्थ्य क्षेत्र की उस सबसे बड़ी खामी को दूर कर दिया है, जिसकी वजह से समय पर इलाज न मिलने के कारण कई मरीज रास्ते में या अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ देते थे।
कैसे काम करता है 'आपात सेतु' सिस्टम?
'आपात सेतु' एक रियल-टाइम डिजिटल इमरजेंसी रेफरल प्लेटफॉर्म है। इसका काम करने का तरीका बेहद आसान और असरदार है। जब भी किसी छोटे अस्पताल से मरीज को AIIMS रेफर किया जाएगा, तो वहां के डॉक्टर मरीज की बीमारी का इतिहास, ब्लड टेस्ट, एक्सरे रिपोर्ट और अब तक दिए गए इलाज की पूरी जानकारी www.aapatsetu.in पोर्टल पर अपलोड कर देंगे। डेटा अपलोड होते ही AIIMS बिलासपुर के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के मोबाइल पर तुरंत एक SMS अलर्ट चला जाएगा।
अस्पताल पहुंचने से पहले शुरू हो जाएगी तैयारी
मरीज अभी एम्बुलेंस में ही होगा और AIIMS के डॉक्टर उसकी पूरी रिपोर्ट देख चुके होंगे। मरीज के अस्पताल पहुंचने से पहले ही ऑपरेशन थिएटर (OT), जरूरी मेडिकल उपकरण, लाइफ-सपोर्ट सिस्टम और डॉक्टरों की टीम बिल्कुल तैयार मिलेगी। यानी अस्पताल पहुंचते ही बिना एक सेकंड गंवाए इलाज शुरू हो जाएगा।
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पहाड़ी राज्यों के लिए वरदान से कम नहीं
हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में खराब मौसम, कठिन रास्ते और प्राकृतिक आपदाएं अक्सर कनेक्टिविटी को मुश्किल बना देती हैं। पिछले 3 सालों में यहां प्राकृतिक आपदाओं के कारण 1,000 से अधिक लोगों की जान गई है और 35,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। ऐसी स्थिति में 'आपात सेतु' जैसा प्लेटफॉर्म गंभीर मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
आगे क्या होगा
दर्श वर्मा ने बताया कि फिलहाल यह प्लेटफॉर्म 100 से 200 अस्पतालों को जोड़ने में सक्षम है, जिसे जल्द ही हजारों अस्पतालों तक बढ़ाया जाएगा। आने वाले समय में एक ऐसा डैशबोर्ड बनेगा, जिससे यह तुरंत पता चल सकेगा कि किस अस्पताल में कौन से बेड खाली हैं। इतना ही नहीं अगले अपडेट में मरीजों की लाइव तस्वीरें और अन्य क्लीनिकल डेटा भेजने की सुविधा भी जोड़ी जाएगी।
पूरे देश के AIIMS में लागू करने की सिफारिश
AIIMS बिलासपुर ने इस ऐप की सफलता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सिफारिश की है कि 'आपात सेतु' को देश के सभी AIIMS संस्थानों में लागू किया जाए। वहीं, डॉ. दिनेश वर्मा का कहना है कि कोई भी अस्पताल अपनी संस्थागत ईमेल आईडी के जरिए www.aapatsetu.in पर जाकर मुफ्त में रजिस्ट्रेशन कर सकता है और इस जीवन-रक्षक नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है।