
राजस्थान की ऐतिहासिक धरती पर बसे अनेक धार्मिक स्थल आज भी आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रमाण हैं। ऐसा ही एक पवित्र स्थान है – चौथ माता का मंदिर, जो कि लगभग 150 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर ज़िले के चौथ का बरवाड़ा गांव में स्थित है, और इसे "मातेश्वरी चौथ माता" के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना चौहान वंश के शासक द्वारा की गई थी, जिन्होंने माता के आदेश पर यह मंदिर पहाड़ी पर बनवाया था। यह मंदिर ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहां तक पहुँचने के लिए भक्तों को सैकड़ों सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। किंतु माता के प्रति भक्ति और श्रद्धा इतनी प्रबल होती है कि यह कठिन चढ़ाई भी भक्तों को सहज प्रतीत होती है।
सुहाग की रक्षा
चौथ माता को विशेष रूप से सुहाग की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। विवाहित महिलाएं यहां आकर अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य सुख की कामना करती हैं। खासकर करवाचौथ, आश्विन नवरात्रि, और अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर की वास्तुकला भी अत्यंत दर्शनीय है। राजस्थानी शैली में बना यह मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि इतिहास और शिल्पकला का भी बेजोड़ उदाहरण है। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान चौथ माता की मूर्ति अत्यंत दिव्य और प्राचीन है।
प्रतिवर्ष लगा है मेला
यहां प्रतिवर्ष मेले का आयोजन भी होता है, जिसमें राजस्थान ही नहीं, देशभर से श्रद्धालु शामिल होते हैं। लोगों का मानना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां जरूर स्वीकार होती है, और माता अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। चौथ माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा, आस्था का केंद्र, और संस्कृति की विरासत है। यहां का वातावरण भक्तिभाव से परिपूर्ण होता है, जो आत्मा को शांति और मन को ऊर्जा प्रदान करता है। अगर आप भी आस्था की शक्ति को महसूस करना चाहते हैं, तो एक बार चौथ माता के दरबार में जरूर जाएं – हो सकता है, आपको भी मिल जाए सुहाग की रक्षा और जीवन की समृद्धि का आशीर्वाद।