राजधानी में सोमवार को बारिश के बीच जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की करीब 200 छात्राओं का सड़क पर उतरना सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं है। बच्चियों ने शिक्षकों की कमी, पढ़ाई प्रभावित होने, भोजन की गुणवत्ता और इलाज जैसी शिकायतें उठाईं। करीब ढाई किलोमीटर चलकर सड़क पर बैठी छात्राओं को मनाने के लिए प्रशासन को मौके पर पहुंचना पड़ा। मामला इतना बढ़ा कि शासन स्तर के अधिकारी भी सक्रिय हुए।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा
सर्वोदय विद्यालय की यह तस्वीर उस समय सामने आई है, जब सरकार परिषदीय स्कूलों के कायाकल्प और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा कर रही है। आंकड़े बताते हैं कि समस्या सिर्फ एक विद्यालय तक सीमित नहीं है।
16 लाख शिक्षक, फिर भी 9508 स्कूलों में अकेला शिक्षक
शिक्षा मंत्रालय के वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार यूपी में सभी प्रबंधन के 2,62,358 स्कूलों में 4.28 करोड़ से अधिक बच्चे और 16,15,427 शिक्षक दर्ज हैं। औसत छात्र-शिक्षक अनुपात करीब 26 है। लेकिन इसी आंकड़े के भीतर असली परेशानी छिपी है। प्रदेश के 9,508 स्कूलों में केवल एक शिक्षक है और इन विद्यालयों में करीब 6.24 लाख बच्चे पढ़ते हैं। यानी प्रदेश का औसत अनुपात ठीक दिखाई देता है, लेकिन कई स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का पूरा बोझ एक ही शिक्षक पर है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनती है।
फरवरी में 46,944 पद खाली, अब 60 हजार की तैयारी
फरवरी 2026 में विधानसभा में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया था कि परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के 46,944 पद रिक्त हैं। तब सरकार ने कहा था कि इन पदों पर फिलहाल नई भर्ती की योजना नहीं है। इसके बाद तस्वीर बदली। जून में करीब 60 हजार रिक्तियों के लिए अधियाचन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इनमें करीब 11,508 पद नगरीय क्षेत्र और 48 हजार से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के बताए गए। अगस्त में नगरीय विद्यालयों के 11,508 पदों का अधियाचन आयोग के पोर्टल पर अपलोड भी किया गया। लेकिन अभी यह प्रक्रिया नियुक्ति तक नहीं पहुंची है।
योगी सरकार का दावा: 1.26 लाख नियुक्तियां
सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मौकों पर बता चुके हैं कि उनकी सरकार के कार्यकाल में बेसिक शिक्षा परिषद में 1.26 लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्तियां की गईं। दिसंबर 2025 में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी विधानसभा में 1.26 लाख से अधिक सहायक अध्यापकों की भर्ती का उल्लेख किया था। मई 2026 में मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद में 21,508 शिक्षक और अनुदेशकों की नई नियुक्ति की घोषणा भी की थी। इनमें नगरीय क्षेत्र के 11,508 शिक्षक और करीब 10 हजार अनुदेशक शामिल हैं। फिर भी सवाल यही है कि इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियों के बाद भी हजारों स्कूल एक शिक्षक के भरोसे क्यों हैं और रिक्त पद लगातार क्यों दिखाई दे रहे हैं?
सुविधाओं में सुधार, लेकिन डिजिटल कमी बरकरार
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत सरकार ने स्कूलों में भवन, शौचालय, पेयजल, फर्नीचर और दूसरी सुविधाएं बढ़ाने का दावा किया है। लेकिन वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक 2.62 लाख स्कूलों में सिर्फ 1,20,465 में इंटरनेट सुविधा दर्ज है। कंप्यूटर सुविधा वाले विद्यालय 1,57,798 हैं। दिव्यांग बच्चों के लिए ढलान की सुविधा 1,86,796 स्कूलों में दर्ज है। इसका मतलब यह नहीं कि बाकी सभी स्कूलों में हर सुविधा पूरी तरह अनुपलब्ध है, लेकिन सरकारी दावों और वास्तविक उपलब्धता के बीच अभी अंतर जरूर है।
पढ़ाई की असली परीक्षा कक्षा में
स्कूल की रंगाई, स्मार्ट कक्षा और फर्नीचर जरूरी हैं, लेकिन शिक्षा की अंतिम कसौटी बच्चे की सीखने की क्षमता है। जब एक शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं या बड़ी संख्या में बच्चों को संभालना पड़े तो नियमित और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई चुनौती बन जाती है। यही कारण है कि 9,508 एकल-शिक्षक विद्यालयों का आंकड़ा सिर्फ नियुक्तियों का विषय नहीं है। यह सीधे कक्षा में पढ़ाई की गुणवत्ता से जुड़ा सवाल है।
60 हजार पदों के लिए अधियाचन की प्रक्रिया शुरू
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने विधानसभा में सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा था कि रिक्त पदों के बावजूद वर्तमान में छात्र-शिक्षक अनुपात मानकों के अनुरूप है और उस समय नई भर्ती की योजना नहीं थी। बाद में सरकार ने करीब 60 हजार पदों के लिए अधियाचन की प्रक्रिया शुरू की है।
शिकायत स्कूल के भीतर सुनी क्यों नहीं गई
वहीं, अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जून 2026 में शिक्षकों से संवाद में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कक्षा-कक्ष में बदलाव की प्रतिबद्धता दोहराई थी। मई में उनके विभागीय निर्देशों के तहत प्रत्येक विद्यालय में कम से कम दो शिक्षक उपलब्ध कराने के लिए समायोजन की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। सर्वोदय की बच्चियों का बारिश में सड़क पर उतरना इसलिए बड़ा सवाल बन जाता है कि शिकायत स्कूल के भीतर सुनी क्यों नहीं गई। सरकार ने भवनों और सुविधाओं में सुधार किया है, भर्तियां भी की हैं, लेकिन अब अगली परीक्षा यही है कि हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक हों और हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पहुंचे।