
Ministry of Transport: देशभर में बने 1,087 टोल प्लाजा से केंद्र सरकार को हर दिन औसतन ₹168.24 करोड़ की आय हो रही है. संसद में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस राजस्व को केंद्रीय समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा किया जाता है, जिसका उपयोग नई सड़कों के निर्माण और मौजूदा सड़कों की मरम्मत में होता है. सरकार ने साफ किया कि टोल वसूली केवल लागत वसूली के लिए नहीं होती, बल्कि यह उपयोगकर्ता शुल्क है जो नियमों के अनुसार तय किया जाता है.
निजी और सरकारी टोल से होती है भारी कमाई
2024-25 में सरकार को टोल वसूली से कुल ₹61,408.15 करोड़ की आय होने का अनुमान है. इसमें से ₹28,823.74 करोड़ सार्वजनिक निधि से संचालित टोल प्लाजाओं से और ₹32,584.41 करोड़ निजी ऑपरेटरों द्वारा संचालित टोल प्लाजाओं से आएगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्गों को टोल फ्री करने की कोई योजना नहीं है. BOT (Build-Operate-Transfer) परियोजनाओं में तय समय के बाद टोल सरकार को सौंपा जाता है, जबकि सार्वजनिक निधि से बनी सड़कों पर टोल वसूली लगातार जारी रहती है.
ईंधन सेस और यूजर फी से होता है सड़क विकास का खर्च
सड़क निर्माण के लिए सरकार दो मुख्य स्रोतों से राजस्व जुटाती है—यूजर फी (टोल) और ईंधन पर लगाए गए सेस (Cess)। टोल वसूली एनएच शुल्क नियम, 2008 के तहत की जाती है, जबकि पेट्रोल-डीजल पर सेस से मिलने वाली राशि 'सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF)' में जाती है। इसी फंड से सड़कों, पुलों, ग्रामीण मार्गों, रेलवे क्रॉसिंग और एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है. सरकार ने यह भी बताया कि निर्माण लागत का निर्धारण भौगोलिक परिस्थितियों, सामग्री और ट्रैफिक भार जैसे कई तकनीकी कारकों पर आधारित होता है.