नेपाल सरकार ने रविवार को बताया कि मिडिल ईस्ट के 12 देशों में 17 लाख से अधिक नेपाली नागरिक रह रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच इनकी सुरक्षा को लेकर सरकार की चिंता बढ़ गई है।
अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण
ईरान की ओर से शनिवार को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के जवाब में सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन पर जवाबी कार्रवाई किए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इन खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में नेपाली प्रवासी कामगार कार्यरत हैं, जिनकी भेजी गई धनराशि (रेमिटेंस) नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
मिस्र में 500 और ईरान में 6 नेपाली नागरिक
विदेश मंत्रालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संयुक्त सचिव राम काजी खड़का ने बताया कि कुल 17,29,288 नेपाली नागरिक कानूनी रूप से इस क्षेत्र के 12 देशों में रह रहे हैं। यूएई में लगभग 7,00,000, सऊदी अरब में 3,84,865, कुवैत में 1,75,000, इराक में 30,000, बहरीन में 28,000, ओमान में 25,000, साइप्रस में 17,000, इजरायल में 6,500, लेबनान में 1,500, मिस्र में 500 और ईरान में 6 नेपाली नागरिक हैं।
10 नेपाली नागरिकों में से चार लौटे
खड़का ने बताया कि ईरान में रह रहे कुल 10 नेपाली नागरिकों में से चार पहले ही नेपाल लौट चुके हैं, जबकि शेष छह देश छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नेपाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मध्य पूर्व में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब तक किसी भी नेपाली नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।
सतर्क रहने की सलाह दी
सरकार ने क्षेत्र में रह रहे नेपाली नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श (ट्रैवल एडवाइजरी) जारी कर उन्हें घरों के अंदर रहने और सतर्क रहने की सलाह दी है। साथ ही, विदेश मंत्रालय और पश्चिम एशिया स्थित नेपाली दूतावासों के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक व्हाट्सएप समन्वय समूह भी बनाया गया है।