Major Decision By Bihar Government: बिहार सरकार ने छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला लेते हुए 26 जुलाई की शाम 6 बजे से पहले दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का निर्णय किया है। गृह विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को भी रिहा किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद पुलिस संबंधित मामलों की जानकारी अदालत को देगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस निर्णय को छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
प्रदर्शन के बाद हुई थी व्यापक कार्रवाई
नीट पेपर लीक के विरोध में बिहार के विभिन्न हिस्सों में हुए प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया और कई मामलों में मुकदमे दर्ज किए। आंदोलन से जुड़े संगठनों और कई राजनीतिक दलों ने इन कार्रवाइयों पर आपत्ति जताते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी। सरकार के ताजा फैसले के बाद इन मामलों को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सैकड़ों लोगों को लिया गया था हिरासत में
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 25 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान राज्यभर में कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें 339 नाबालिगों और छात्रों को सत्यापन के बाद पहले ही रिहा कर दिया गया था। वहीं, हिंसा से जुड़े आरोपों में 355 लोगों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब सरकार के फैसले के बाद शेष मामलों में भी कानूनी कार्रवाई वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
यह भी देखेंःRecruitment Of 69,000 Teachers: 69 हजार शिक्षक भर्ती पर सरकार का हलफनामा, मौजूदा शिक्षकों की नौकरी रहेगी सुरक्षित
हिंसा में पुलिसकर्मी और नागरिक हुए घायल
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में सीवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक, दो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी तथा गांधी मैदान थाना प्रभारी सहित कुल 91 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके अलावा 13 आम नागरिक भी इस दौरान जख्मी हुए। हिंसा में 14 सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचा, जबकि एक सरकारी वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। इन घटनाओं की जांच भी की गई थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच आया फैसला
प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा। कई नेताओं ने कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की थी। सरकार के ताजा फैसले के बाद अब संबंधित मामलों को अदालत के माध्यम से वापस लेने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों को कानूनी राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जाएगी।