19 Year Old Sheetal Devi Created History: भारत की युवा तीरंदाज शीतल देवी ने एशियन पैरा गेम्स 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींच लिया है। महज 19 साल की उम्र में उन्होंने तीरंदाजी में विश्व रिकॉर्ड बनाया और भारत का नाम रोशन किया। शीतल ने महिला कंपाउंड तीरंदाजी के प्री-क्वार्टर फाइनल में 150 में से 149 अंक हासिल किए। इसके साथ ही उन्होंने ब्रिटेन की तीरंदाज जेसिका स्ट्रेटन के 148 अंकों के पुराने विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
क्वालिफिकेशन राउंड में भी किया कमाल
शीतल देवी ने सिर्फ मुकाबले में ही नहीं, बल्कि क्वालिफिकेशन राउंड में भी शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 720 में से 704 अंक हासिल करके विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना पुराना एशियाई रिकॉर्ड भी बेहतर किया। उनकी सटीक निशानेबाजी ने दिखा दिया कि बड़े मंच पर भी वह दबाव में शानदार खेल दिखा सकती हैं। शीतल की इस उपलब्धि से भारतीय पैरा तीरंदाजी को नई पहचान मिली है।
पैरों से निशाना लगाकर जीतती हैं मुकाबले
शीतल देवी की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनके जन्म से ही दोनों हाथ नहीं हैं। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया। वह अपने पैरों और शरीर की मदद से धनुष संभालती हैं और निशाना लगाती हैं। उनकी मेहनत, लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास ने उन्हें दुनिया के बेहतरीन पैरा तीरंदाजों में शामिल कर दिया है। शीतल की सफलता उन लोगों के लिए भी प्रेरणा है, जो मुश्किलों के कारण अपने सपनों से पीछे हटने लगते हैं।
सेमीफाइनल जीतकर फाइनल में बनाई जगह
शीतल ने विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद भी अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा। उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में हांगकांग की खिलाड़ी को 149-134 से हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में फिलीपींस की खिलाड़ी को 147-135 से मात दी। सेमीफाइनल में जापान की अया शिनोहारा को 145-137 से हराकर उन्होंने फाइनल में जगह बना ली। अब उनकी नजर खिताब जीतने पर है।
पहले भी देश को दिला चुकी हैं गौरव
शीतल देवी इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने 2022 के पैरा एशियन गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीते थे। साल 2024 के पैरालंपिक खेलों में उन्होंने मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक भी हासिल किया था। साल 2025 में वह पैरा तीरंदाजी विश्व चैंपियन भी बनीं। अब एशियन पैरा गेम्स 2026 में उनके प्रदर्शन से भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। शीतल की यह उपलब्धि बताती है कि मेहनत और हौसले से बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।