मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में वरिष्ठ अधिवक्ता की दिनदहाड़े हत्या के बाद प्रदेशभर का वकील समुदाय आक्रोशित है। घटना के विरोध में आज सभी जिलों में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाते हुए ‘प्रतिवाद दिवस’ मनाया। अदालतों में पैरवी नहीं होने से हजारों मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई। वकीलों ने मृतक परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा, सरकारी नौकरी और अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करने की मांग उठाई है।
हत्या के विरोध में प्रदेशव्यापी हड़ताल
14 फरवरी को शिवपुरी जिले के करैरा में हुए सनसनीखेज हत्याकांड के बाद सोमवार को प्रदेशभर के अधिवक्ता हड़ताल पर रहे। सभी जिला एवं तहसील न्यायालयों में वकीलों ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाए रखी। कोर्ट परिसर में मौजूद रहने के बावजूद उन्होंने किसी भी मामले में बहस या पैरवी नहीं की। इस सामूहिक विरोध के चलते हजारों मामलों की सुनवाई टल गई और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
दिनदहाड़े गोलीबारी, मौके पर मौत
वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना (57) रोज की तरह बाइक से करैरा सिविल कोर्ट जा रहे थे। सागर ताल/आनंद सागर मंदिर के पास पहले से घात लगाए बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में जमीन विवाद, चुनावी रंजिश और सुपारी हत्या जैसे एंगल सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि 10 लाख रुपये में हत्या की साजिश रची गई, जिसमें 2 लाख रुपये एडवांस दिए गए थे।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
घटना के बाद पुलिस ने विशेष टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की। रविवार को एक शॉर्ट एनकाउंटर के दौरान तीन शूटरों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें एक आरोपी घायल हुआ। अब तक कुल पांच लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहराई से जांच जारी है और जल्द ही पूरे षड्यंत्र का खुलासा किया जाएगा।
अधिवक्ताओं की चार प्रमुख मांगें
वकील समुदाय ने मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान करने, आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने और अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अधिवक्ता ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो न्याय व्यवस्था कमजोर होगी।
आंदोलन की चेतावनी
अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय में मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो राजधानी भोपाल में बड़ा घेराव और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। वकील समुदाय ने इसे न्याय और सुरक्षा की लड़ाई बताते हुए एकजुटता का संदेश दिया है।