वित्त मंत्रालय ने 2.5 लाख करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी योजना के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। मंत्रालयों के बीच परामर्श पूरा हो चुका है और अब इस प्रस्ताव को जल्द कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है। इस योजना का उद्देश्य उन सेक्टरों को राहत देना है, जो मौजूदा वैश्विक हालात और नकदी संकट से जूझ रहे हैं।
ईएफसी से मिल चुकी है मंजूरी
इस योजना को पहले ही व्यय वित्त समिति की मंजूरी मिल चुकी है। इसका मतलब है कि योजना की रूपरेखा, लागत और वित्तीय प्रभाव का आकलन पूरा हो चुका है। ईएफसी बड़े सरकारी खर्च प्रस्तावों की जांच करती है और उन्हें कैबिनेट के लिए तैयार करती है, जिससे यह योजना अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
एमएसएमई और एविएशन को खास फायदा
प्रस्तावित योजना का सबसे ज्यादा फायदा एमएसएमई और एविएशन सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। एमएसएमई क्षेत्र पहले से ही लागत बढ़ने और मांग में गिरावट के दबाव में है। वहीं एविएशन सेक्टर ईंधन की कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण परिचालन चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह योजना इन सेक्टरों को वित्तीय राहत देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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ECLGS के विस्तार के रूप में योजना
यह नई योजना आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना यानी ECLGS के विस्तार के तौर पर लाई जा रही है। इस योजना की शुरुआत 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी, ताकि छोटे कारोबारों को सहारा मिल सके। अब उसी मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू कर मौजूदा संकट से निपटने की कोशिश की जा रही है।
वैश्विक संकट के बीच राहत की कोशिश
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। इससे कमोडिटी की कीमतें, सप्लाई चेन और व्यापार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सरकार इस योजना के जरिए व्यवसायों को नकदी संकट से बचाना चाहती है, ताकि वे समय पर कर्ज चुका सकें और डिफॉल्ट की स्थिति न बने।
आगे का रास्ता कैबिनेट पर निर्भर
अब इस योजना को लागू करने का फैसला कैबिनेट की मंजूरी पर निर्भर करेगा। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह देश के कई कमजोर सेक्टरों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। सरकार का उद्देश्य साफ है कि आर्थिक दबाव के बावजूद कारोबार चलते रहें और रोजगार पर असर न पड़े।