Indian Job Market: शेयर बाज़ार के विशेषज्ञ और मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने भारतीय रोज़गार बाज़ार के भविष्य को लेकर एक बड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि भारत में लगभग 2 करोड़ मिडिल क्लास लोगों की नौकरी खतरे में है। जिसका कारण मंदी नहीं है बल्कि कई अन्य वजहों से लोगों की नौकरियां खतरे में है। उनका कहना है कि अगर भारत पर ट्रंप सरकार टैरिफ को नहीं घटाती है, तो विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते है।
एआई का बढ़ रहा प्रभाव
मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी के अनुसार लोगों की नौकरियां मंदी के कारण नहीं प्रभावित होंगी बल्कि कंपनियों के ऑपरेशन, AI और ग्लोबल व्यापार के परिस्थितियों के कारण नौकरियां जा सकती है। सौरभ मुखर्जी के अनुसार ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव के कारण भारत में व्हाइट कॉलर जॉब्स में वृद्धि का पहिया लगभग थम चुका है।
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जॉब मार्केट में भारी उथल-पुथल देख रहे
सौरभ मुखर्जी ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान कहा था कि व्हाइट कॉलर जॉब्स की ग्रोथ में आया यह धीमापन अस्थायी नहीं है, उन्हें नहीं लगता कि अब इन नौकरियों में किसी भी तरह की सार्थक वृद्धि होने की कोई संभावना है क्योंकि ऑटोमेशन बड़ी कंपनियों के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि हम जॉब मार्केट में भारी उथल-पुथल देख रहे हैं, आईटी, बैकिंग और मीडिया जैसे मानक मिडिल क्लास नौकरियों की जगह गिग जॉब्स ले लेगा। उनका कहना है कि अब बड़ी कपनियों को विस्तार के लिए बड़ी टीमों की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा मेरा अनुमान है कि भारत को इसका असर झेलने में अभी लगभग दो से तीन साल लग सकते हैं।
आने वाली पीढ़ी को तैयार रहने की दी सलाह
पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने आगे कहा कि अब अधिकतर कंपनियां एआई को अपना रही है। चाहे फिर वो बैंक हो या फिर मीडिया संस्थान। कई जगह तो विज्ञापन भी एआई बेस्ड हो गए हैं। यहां तक की एड में दिखने वाली मॉडल भी एआई बेस्ड है। वहीं सौरभ मुखर्जी ने वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को तैयार रहने की सलाह दी है। पारंपरिक व्हाइट कॉलर जॉब्स अब एक बड़ी चुनौती बन सकता है।