2020 Delhi riots case: साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया है। दोनों ने यह दलील दी थी कि वे पांच साल से अधिक समय से जेल में हैं और अभी तक मुकदमे का अंतिम निपटारा नहीं हुआ है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी कथित भूमिका को मामले में केंद्रीय बताते हुए राहत देने से मना कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने इसी केस में शामिल पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है।
पांच आरोपियों को मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम और शादाब अहमद को जमानत प्रदान की है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि इन आरोपियों की भूमिका शरजील इमाम और उमर खालिद की तुलना में कम गंभीर प्रतीत होती है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि ये सभी आरोपी लंबे समय से जेल में हैं और अब तक मुकदमे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इसी आधार पर उन्हें सशर्त रिहाई की अनुमति दी गई।
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दोबारा जमानत की समयसीमा
इस मामले में आरोपियों पर आईपीसी की कई धाराओं के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए की धाराएं भी लागू हैं। यूएपीए की धारा 43D(5) के तहत जमानत के लिए कड़े मानक तय हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शरजील इमाम और उमर खालिद मुख्य गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद दोबारा जमानत अर्जी दाखिल कर सकते हैं। अगर निचली अदालत में ट्रायल में देरी होती है, तो वे इस आदेश के एक वर्ष बाद फिर से जमानत की मांग कर सकते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि मामले की सुनवाई में तेजी लाई जाए।