मध्यप्रदेश सरकार राज्य को खेलों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में बड़े और ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2028 में होने वाले राष्ट्रीय खेलों (National Games) की मेजबानी के लिए केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। सरकार की मंशा प्रदेश को ‘Sports Hub’ के रूप में विकसित करने की है। इस दिशा में भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा, एशियन रोइंग चैम्पियनशिप जैसे आयोजनों की मेजबानी से मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का अनुभव भी मिलेगा। खेलों को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को एक ऐसा मंच देना है, जहां से वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।
2028 नेशनल गेम्स की मेजबानी का प्रस्ताव भेजा
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में हुई खेल एवं युवा कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में बताया कि 2028 में प्रस्तावित नेशनल गेम्स के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तैयारियों में कोई कमी न रहे और राज्य को इस आयोजन के लिए पूरी तरह से तैयार किया जाए।
एशियन रोइंग चैम्पियनशिप की विशेष तैयारी
प्रदेश में अक्टूबर 2025 में एशियन रोइंग चैम्पियनशिप का आयोजन होगा। इसके लिए भोपाल के खानूगांव स्थित वॉटर स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। यह आयोजन न सिर्फ खेलों को बढ़ावा देगा, बल्कि भोपाल को ओलंपिक 2036 के वॉटर स्पोर्ट्स स्थल के रूप में मजबूत दावेदार बना सकता है।
985 करोड़ की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
भोपाल के नाथू-बरखेड़ा में 985 करोड़ रुपये की लागत से एक अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। इसमें एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, इनडोर-आउटडोर खेलों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। साथ ही एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना पर भी तेजी से काम चल रहा है।
खेलों को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री ने खेलों को स्कूल-कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल करने और कॉलेज स्तर पर स्पोर्ट्स फैकल्टी शुरू करने के निर्देश दिए। पचमढ़ी और ओंकारेश्वर में साहसिक खेल गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की योजना भी बनाई जा रही है।
खिलाड़ियों को नौकरी में प्राथमिकता
पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में मौका देने की योजना पर भी विचार किया गया। अन्य राज्यों की नीति का अध्ययन कर इस योजना को प्रभावी बनाने की बात कही गई है।