देश के चर्चित 217 करोड़ रुपये की उगाही और ठगी मामले में मुख्य आरोपी सुकेश चंद्रशेखर तथा उसकी पत्नी लीना पॉलोज समेत कुल 21 आरोपियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को इस मामले में बड़ी सफलता मिली है। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित विशेष एमसीओसीए अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में आरोप तय कर दिए हैं।
मजबूत साक्ष्यों का प्रमाण माना जा रहा
अदालत का यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। दिल्ली पुलिस आर्थिक अपराध शाखा के अतिरिक्त आयुक्त पुलिस, रवि कुमार सिंह ने बताया कि विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत ने 30 मई 2026 को सुनाए गए आदेश में सुकेश चंद्रशेखर, लीना पॉलोज और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) की धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एमसीओसीए के तहत आरोप तय होना जांच में जुटी टीम द्वारा जुटाए गए मजबूत साक्ष्यों का प्रमाण माना जा रहा है।
आपराधिक साजिशों को अंजाम दिया
जांच में सामने आया कि कथित तौर पर जेल के भीतर बैठकर एक संगठित अपराध सिंडिकेट संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये की उगाही, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिशों को अंजाम दिया गया। मामले की तह तक पहुंचने के लिए ईओडब्ल्यू ने पिछले चार वर्षों में हजारों दस्तावेजों की जांच की, वित्तीय लेन-देन की बारीकी से पड़ताल की और बड़ी संख्या में गवाहों के बयान दर्ज किए।
कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए गए
जांच एजेंसी के अनुसार, मामले में कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए गए हैं। इनमें गवाहों के बयान, एमसीओसीए के तहत दर्ज स्वीकारोक्ति बयान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वॉयस रिकॉर्डिंग, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), अपराध में इस्तेमाल मोबाइल फोन, हवाला लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई लग्जरी कारों व अन्य संपत्तियों की बरामदगी शामिल है।
आरोप तय करने का आदेश दिया
ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि यह जांच अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन टीम ने पेशेवर दक्षता और निरंतर प्रयासों के बल पर आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों की मजबूत श्रृंखला तैयार की। इसी का परिणाम है कि अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
विभिन्न कानूनी पहलुओं पर भी सक्रियता
मामले की पैरवी में एसीपी वीरेंद्र कादयान और इंस्पेक्टर प्रदीप राय की विशेष भूमिका रही। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में दोनों अधिकारियों ने ट्रायल कोर्ट से लेकर दिल्ली हाईकोर्ट तक मामले का प्रभावी ढंग से अनुसरण किया। राज्य सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक अखंड प्रताप सिंह ने अदालत में पक्ष रखा। टीम ने आरोपियों की जमानत याचिकाओं और आरोप तय करने से जुड़े विभिन्न कानूनी पहलुओं पर भी सक्रियता से पैरवी की।
साजिशों के खिलाफ कार्रवाई
रवि कुमार सिंह ने कहा है कि वह संगठित वित्तीय अपराधों, उगाही गिरोहों और आपराधिक साजिशों के खिलाफ अपनी कार्रवाई लगातार जारी रखेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला इस बात का उदाहरण है कि चाहे अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो और कहीं से भी अपने नेटवर्क का संचालन क्यों न कर रहा हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकता।
217 करोड़ रुपये के इस बहुचर्चित मामले में अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई और मुकदमे की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां सुकेश चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों के खिलाफ जुटाए गए साक्ष्यों की न्यायिक परीक्षा होगी।