Taksal Cinema shootout: उत्तर प्रदेश के चर्चित टकसाल सिनेमा गोलीकांड मामले में 24 साल बाद बड़ा फैसला सामने आया है। एमपी/एमएलए कोर्ट ने विधायक अभय सिंह, एमएलसी विनीत सिंह समेत छह आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है, खासकर उन अहम बिंदुओं को लेकर जो अदालत में टर्निंग पॉइंट साबित हुए।
क्या था पूरा मामला
4 अक्टूबर 2002 को वाराणसी के टकसाल सिनेमा के पास दिनदहाड़े गोलीबारी हुई थी। उस समय सिनेमा में फिल्म का शो शुरू होने वाला था। अचानक दो गाड़ियों—सफारी और बोलेरो—के बीच ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। करीब 100 राउंड गोलियां चलीं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। इस हमले में तत्कालीन विधायक धनंजय सिंह समेत कई लोग घायल हो गए थे।
पहला टर्निंग पॉइंट
बचाव पक्ष के मुताबिक, जिस सफारी गाड़ी पर गोली चलने की बात कही गई, उसे कभी पुलिस कस्टडी में लिया ही नहीं गया। इतना ही नहीं, गाड़ी का जो नंबर बताया गया था, वह बाद में किसी जेसीबी मशीन का निकला। इस बड़ी चूक ने केस को कमजोर कर दिया।
मोबाइल नंबर पर सवाल
अदालत में यह भी सामने आया कि जिस मोबाइल नंबर से घटना की सूचना देने का दावा किया गया, वह नंबर घटना के कई साल बाद, 2006 में जारी हुआ था। इससे गवाह के बयान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
तीसरा टर्निंग पॉइंट
सबसे अहम बिंदु यह रहा कि घटना के समय अभय सिंह के फैजाबाद में इलाज कराने के सबूत पेश किए गए। यानी वह घटनास्थल से करीब 250 किलोमीटर दूर थे। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल के नक्शे में भी मेल नहीं पाया गया, जिससे अभियोजन पक्ष की कहानी कमजोर पड़ गई।
फैसले के बाद चर्चा तेज
इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया। फैसले के बाद कोर्ट परिसर में समर्थकों ने नारेबाजी भी की। यह मामला अब एक उदाहरण बन गया है कि कैसे साक्ष्यों में छोटी-छोटी खामियां बड़े केस का रुख बदल सकती हैं।