27 October 2026 Panchang: 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार को कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि अगले दिन यानी 28 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। इसके बाद तृतीया तिथि शुरू हो जाएगी। मंगलवार सुबह 10 बजकर 53 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। इसके बाद व्यतिपात योग का आरंभ होगा। भरणी नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 40 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद कृत्तिका नक्षत्र लग जाएगा। धार्मिक दृष्टि से भी आज का दिन खास है, क्योंकि इस दिन अशून्य शयन व्रत रखा जाएगा। इस व्रत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम बना रहता है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। आइए जानते हैं मंगलवार का पूरा पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
27 अक्टूबर 2026 का पंचांग
दिन: मंगलवार
मास: कार्तिक
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: द्वितीया, 28 अक्टूबर की सुबह 4:08 बजे तक
नक्षत्र: भरणी, दोपहर 3:40 बजे तक
योग: सिद्धि योग, सुबह 10:53 बजे तक; इसके बाद व्यतिपात योग
व्रत: अशून्य शयन व्रत
27 अक्टूबर के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 से 5:38 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:13 से 6:29 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:57 से 2:41 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:40 से 6:06 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 5:40 से 6:57 बजे तक
अमृत काल: सुबह 11:15 से दोपहर 12:43 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:39 से अगले दिन 12:31 बजे तक
त्रिपुष्कर योग: दोपहर 3:39 बजे से अगले दिन सुबह 4:06 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 3:39 बजे से अगले दिन सुबह 6:30 बजे तक
27 अक्टूबर को किस शहर में कब रहेगा राहुकाल?
दिल्ली: दोपहर 2:53 से शाम 4:16 बजे तक
मुंबई: दोपहर 3:15 से शाम 4:42 बजे तक
चंडीगढ़: दोपहर 2:53 से शाम 4:16 बजे तक
लखनऊ: दोपहर 2:39 से शाम 4:03 बजे तक
भोपाल: दोपहर 2:54 से शाम 4:20 बजे तक
कोलकाता: दोपहर 2:11 से 3:37 बजे तक
अहमदाबाद: दोपहर 3:14 से शाम 4:39 बजे तक
चेन्नई: दोपहर 2:48 से शाम 4:16 बजे तक
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
सूर्योदय: सुबह 6:29 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:40 बजे
चंद्रोदय: शाम 6:19 बजे
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क्या है अशून्य शयन व्रत का महत्व?
हिंदू धर्म में अशून्य शयन व्रत को पति-पत्नी के रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है। यह व्रत चातुर्मास के चार महीनों में कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर रखा जाता है। कार्तिक मास चातुर्मास का अंतिम महीना होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी तालमेल बना रहता है। अशून्य शयन का भाव है कि व्यक्ति को अपने जीवनसाथी से अलग होकर न रहना पड़े। इसी मान्यता के चलते इस व्रत को दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि और पति-पत्नी के बीच रिश्ते की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। परंपरा के अनुसार, यह व्रत पुरुषों द्वारा किया जाता है।
अशून्य शयन व्रत में कैसे करें पूजा?
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर उपवास करना चाहिए। शाम को चंद्रोदय होने पर चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। इस बार 27 अक्टूबर को चंद्रमा शाम 6 बजकर 19 मिनट पर उदय होगा। ऐसे में चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पूजा की जा सकती है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से पति-पत्नी के बीच स्नेह बना रहता है और घर में सुख-शांति आती है।