Bulandshahr News: डिबाई थाना क्षेत्र के गांव सतोहा निवासी 30 वर्षीय लतेश पत्नी मनोज की अलीगढ़ के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने सतोहा स्थित सुमित मेमोरियल हॉस्पिटल पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में बिना उचित जांच के गलत खून चढ़ा दिया गया, जिससे महिला की हालत बिगड़ गई। गंभीर स्थिति होने पर उसे अलीगढ़ रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में मृतका के भाई वेद प्रकाश ने डिबाई कोतवाली में डॉक्टर गौरव के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
परिजनों के मुताबिक, लतेश को 14 अगस्त को यूट्रस में रसौली की शिकायत के चलते कादरीबाग स्थित सुमित मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई। परिजनों ने अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही बरतने और गलत खून चढ़ाने का आरोप लगाया है। हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे अलीगढ़ रेफर कर दिया। वहां एक अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत की सूचना गांव पहुंचने पर परिजन आक्रोशित हो गए और सुमित मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंचकर प्रदर्शन किया।
पांच बेड की अनुमति, मौके पर मिले 15
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया। डिप्टी सीएमओ डॉ. सचिन के निरीक्षण में अस्पताल के पास पांच बेड संचालित करने की अनुमति होने की जानकारी मिली, जबकि मौके पर 15 बेड संचालित पाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर अस्पताल संचालक को नोटिस जारी करते हुए व्यवस्थाओं और अस्पताल संचालन की अनुमति के संबंध में जवाब मांगा है।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम को भेजा
डिबाई कोतवाली प्रभारी विशाल प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि 17 अगस्त को लतेश की अलीगढ़ के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत होने की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुंची तो परिजन शव को गांव ले आए थे। परिजनों की इच्छा पर पंचायतनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, लतेश को पहले सुमित मेमोरियल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालत नाजुक होने पर उसे अलीगढ़ के क्वार्सी स्थित बघेल अस्पताल रेफर किया गया था, जहां उसकी मौत हुई।
मामले की जांच की जा रही
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिजनों की ओर से लगाए गए गलत खून चढ़ाने और इलाज में लापरवाही के आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।