इंदौर शहर की एक कोठी, जिसका नाम सुनते ही रूह कांप उठती है—फूटी कोठी। यह कोई आम इमारत नहीं, बल्कि रहस्यों, डर और अधूरे इतिहास से भरी एक हवेली है। इस कोठी में 365 कमरे हैं, लेकिन कोई नहीं जानता कि आखिरी कमरा कौन-सा है। कहा जाता है कि यहां जाने वाले कई लोग रहस्यमयी घटनाओं के शिकार बन चुके हैं। अंग्रेजों को टक्कर देने के इरादे से शुरू हुआ इसका निर्माण कभी पूरा नहीं हो पाया। अब ये इमारत रहस्य और डर का ऐसा गढ़ बन चुकी है, जिसे लोग दूर से ही देखना पसंद करते हैं।
नाम सुनते ही सिहर उठती है रूह, कोठी जो अधूरी भी है और डरावनी भी
इंदौर शहर के सुदामा नगर में एक ऐसी कोठी मौजूद है, जिसके नाम से ही लोग कांप जाते हैं। ‘फूटी कोठी’ नाम की इस रहस्यमयी हवेली में 365 कमरे हैं—हर दिन के लिए एक कमरा! लेकिन हैरानी की बात ये है कि इन कमरों में आज तक कोई पूरा सफर तय नहीं कर पाया। कहते हैं ये कोठी शापित है। इसकी अधूरी सीढ़ियां, खुली छत और रहस्यमयी हवाएं इसे भूतिया बना देती हैं। कोठी के अंदर बने मंदिर भी यहां की दहशत को कम नहीं कर पाए। तुकोजीराव होलकर की भव्य कल्पना जो रहस्य बनकर रह गई,, 1886 में होलकर शासक तुकोजीराव ने इस विशाल कोठी का निर्माण शुरू कराया था। अंग्रेजों को चुनौती देने के उद्देश्य से बनाई जा रही यह इमारत 1902 तक अधूरी छोड़ दी गई। तब से आज तक इसे कोई पूरा नहीं कर पाया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इसमें मौजूद 365 कमरे और अधूरी सीढ़ियां अशुभ हैं।
इंग्लैंड से आया राजमिस्त्री भी रहस्य के आगे हार गया
कहा जाता है कि एक बार दरवाजे की मरम्मत के लिए इंग्लैंड से राजमिस्त्री बुलाया गया, लेकिन जब भी वह काम शुरू करता, रहस्यमयी हवाएं चलने लगतीं और वह डरकर भाग जाता। इसके बाद किसी ने इस कोठी को छूने की हिम्मत नहीं की।
डर को शांत करने बने 18 मंदिर, लेकिन रहस्य कायम
समय के साथ लोगों ने कोठी के भीतर 18 मंदिर बनाए ताकि डर दूर हो सके। इनमें विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गईं, लेकिन इसके बावजूद कोठी के कई हिस्से आज भी बंद हैं। कुछ सीढ़ियों को तो स्थायी रूप से सील कर दिया गया है।
आज भी वीरान है कोठी, लेकिन रहस्य बना है जिंदा हालांकि फूटी कोठी आम लोगों के लिए खुली है, लेकिन यहां जाने की हिम्मत बहुत कम लोग जुटा पाते हैं। लोग आज भी मानते हैं कि इस कोठी में कुछ अनसुलझे राज और अदृश्य शक्तियां मौजूद हैं, जो इसे सबसे रहस्यमयी बना देती हैं।