5 Mysterious Shiva Temples: सावन का सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। भारत में महादेव के अनगिनत मंदिर हैं, लेकिन इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनसे जुड़ी मान्यताएं और परंपराएं उन्हें दूसरे मंदिरों से बिल्कुल अलग बनाती हैं। कहीं समुद्र की लहरें खुद शिवलिंग का अभिषेक करती हैं, तो कहीं मंदिर ज्वार के दौरान पानी में समा जाता है। किसी धाम के शिवलिंग के रंग बदलने की बात कही जाती है, तो किसी मंदिर में आकाशीय बिजली गिरने की अनोखी परंपरा जुड़ी हुई है। आइए जानते हैं भगवान शिव के ऐसे ही पांच अनोखे धामों के बारे में।
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर, गुजरात
गुजरात के कावीं-कंबोई क्षेत्र में समुद्र तट के पास स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर अपनी अनोखी प्राकृतिक स्थिति के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र है। ज्वार बढ़ने पर समुद्र का पानी मंदिर परिसर तक पहुंच जाता है और कुछ समय के लिए शिवलिंग पानी में डूब जाता है। ज्वार कम होने के बाद मंदिर फिर से दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि यहां आने वाले श्रद्धालु समुद्र के ज्वार-भाटे का समय देखकर दर्शन की योजना बनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान का संबंध भगवान कार्तिकेय और तारकासुर की कथा से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि तारकासुर के वध के बाद कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।
निष्कलंक महादेव मंदिर, गुजरात
गुजरात के भावनगर जिले में कोलियाक तट से समुद्र की ओर स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण बेहद खास है। समुद्र का पानी बढ़ने पर मंदिर का बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है और ज्वार उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल मंदिर तक पहुंचते हैं। यहां मौजूद शिवलिंगों पर समुद्र की लहरों से प्राकृतिक रूप से जल चढ़ता है। धार्मिक मान्यता इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से जोड़ती है। कथा के अनुसार, युद्ध के बाद पांडवों ने अपने ऊपर लगे पापों के प्रायश्चित के लिए भगवान कृष्ण के निर्देश पर यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी वजह से इस स्थान को 'निष्कलंक' महादेव के नाम से जाना जाता है।
अचलेश्वर महादेव मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के धौलपुर इलाके में चंबल के बीहड़ों के बीच स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी रहस्यमयी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां के शिवलिंग को लेकर कहा जाता है कि इसका रंग दिन के अलग-अलग समय में बदलता हुआ दिखाई देता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, सुबह शिवलिंग का रंग लाल, दोपहर में केसरिया और शाम के समय काला नजर आता है। इस बदलाव को लेकर अलग-अलग धारणाएं प्रचलित हैं। शिवलिंग की गहराई को लेकर भी एक रहस्य बताया जाता है। कहा जाता है कि इसकी गहराई जानने के लिए खुदाई का प्रयास किया गया, लेकिन इसकी अंतिम सीमा का पता नहीं चल सका।
लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में स्थित लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर का संबंध भगवान राम और लक्ष्मण से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं से बताया जाता है। मान्यता है कि खर-दूषण के वध के बाद भगवान राम ने लक्ष्मण के आग्रह पर यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां मौजूद शिवलिंग को 'लक्ष्यलिंग' कहा जाता है। इसकी खासियत यह बताई जाती है कि इसमें बड़ी संख्या में छोटे-छोटे छिद्र हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इनमें से एक छिद्र का संबंध पाताल से माना जाता है, जिसमें डाला गया पानी दिखाई नहीं देता। वहीं दूसरे छिद्र में पानी हमेशा मौजूद रहने की बात कही जाती है, जिसे अक्षय कुंड के नाम से जाना जाता है। स्थानीय परंपरा में यह भी कहा जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल मंदिर के पीछे स्थित कुंड तक पहुंचता है और यह कुंड कभी सूखता नहीं है।
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बिजली महादेव मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू क्षेत्र में ऊंची पहाड़ी पर स्थित बिजली महादेव मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक मान्यता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर व्यास और पार्वती नदियों के आसपास के क्षेत्र में स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है। बिजली गिरने के बाद शिवलिंग के टुकड़े हो जाते हैं। इसके बाद मंदिर के पुजारी इन टुकड़ों को मक्खन की मदद से जोड़ते हैं। मान्यता है कि कुछ समय बाद शिवलिंग दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी अनोखी मान्यता के कारण इस धाम का नाम 'बिजली महादेव' पड़ा। सावन के महीने में यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।