उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में रविवार को एक तेल कंपनी के कर्मचारियों द्वारा प्रशासन को बिना सूचित किए भारी मात्रा में विस्फोटक का उपयोग करने से हड़कंप मच गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का प्रस्तावित दौरा इस घटना के बाद सवालों के घेरे में आ गया है.
क्या हुआ था?
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय से अधिकृत एक कंपनी के कर्मचारी सर्वेक्षण के लिए बहराइच पहुंचे थे. उन्होंने अमोनियम नाइट्रेट नामक विस्फोटक का उपयोग कर जमीन के अंदर 30 मीटर ड्रिलिंग की योजना बनाई थी. हालांकि उन्होंने स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों को पूर्व सूचना नहीं दी, जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया.
स्थानीय प्रतिक्रिया और विधायक की चिंता
महसी विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक सुरेश्वर सिंह ने इस घटना को सुरक्षा चूक करार देते हुए मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को रद्द करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि विस्फोटक सामग्री के साथ सैकड़ों बाहरी लोग जिले में मौजूद हैं, जो खतरनाक हो सकता है. सुरेश्वर सिंह ने प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद से फोन पर बात कर इस मामले की पूरी जांच तक मुख्यमंत्री के दौरे को स्थगित करने की अपील की है.
कंपनी ने दी सफाई
अल्फा जिओ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी कुलदीप शर्मा ने बताया कि उन्होंने फरवरी में संबंधित अधिकारियों को सूचित किया था, लेकिन रविवार को काम शुरू करने से पहले प्रशासन को सूचना देने में चूक हो गई.
50-60 कर्मचारियों से थाने में पूछताछ
एसडीएम आलोक प्रसाद और अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि कंपनी के लगभग 200 कर्मचारी विभिन्न गांवों में कार्यरत हैं. अधिकतर कर्मचारी पश्चिम बंगाल से आए हैं और हिंदी में दक्ष नहीं हैं. स्थानीय जनता के आक्रोश को देखते हुए सभी कर्मचारियों को हरदी थाने बुलाया गया है. आज की ड्यूटी पर तैनात लगभग 50-60 कर्मचारियों से थाने में पूछताछ की जा रही है. किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है. पूछताछ और जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मुख्यमंत्री का प्रस्तावित दौरा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को बहराइच के चित्तौरा मंा महाराज सुहेलदेव के भव्य स्मारक का उद्घाटन करने वाले हैं. प्रशासन और भाजपा संगठन दौरे की तैयारियों में जुटे हुए हैं. हालांकि, विस्फोटक सामग्री की बरामदगी और सुरक्षा चूक के बाद इस दौरे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
यह घटना प्रशासनिक चूक और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है, विशेषकर जब मुख्यमंत्री का दौरा किसी जिले में प्रस्तावित हो. अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और मुख्यमंत्री का दौरा निर्धारित समय पर होता है या नहीं.