Tirupati Temple: तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में बीते एक दशक से चले आ रहे 54 करोड़ रुपये के रेशमी शॉल घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भक्तों में गहरा आक्रोश है। यह घोटाला तब सामने आया जब TTD बोर्ड अध्यक्ष बी.आर. नायडू ने शॉल की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई और आंतरिक जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि ठेकेदारों ने शुद्ध शहतूत रेशम की जगह सस्ते पॉलिएस्टर कपड़े से बने शॉल मंदिर को सप्लाई किए। ये शॉल प्रमुख दानदाताओं को भेंट किए जाते थे और विभिन्न अनुष्ठानों, विशेषकर ‘वेद आशीर्वादम’, में उपयोग होते थे। आरोप है कि 350 रुपये की असली कीमत वाले शॉल को 1,300 रुपये बताकर मंदिर को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हुई
घोटाले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। पूर्व वित्त मंत्री और YSRCP नेता बुग्गना राजेंद्रनाथ ने TTD बोर्ड के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा मामला राजनीतिक रूप से तूल दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गड़बड़ी एक दशक से चल रही थी, तो 2015 से 2019 तक की सरकार ने क्यों कोई कदम नहीं उठाया? उन्होंने इसे भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ बताकर कहा कि पहले भी लड्डू प्रसाद में घी की मिलावट का झूठा आरोप लग चुका है, जो जांच में गलत साबित हुआ था।
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ACB जांच और टेंडर रद्द
TTD की सतर्कता रिपोर्ट में नमूने दो प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजे गए, जिनमें केंद्रीय रेशम बोर्ड की लैब भी शामिल थी। दोनों ने पुष्टि की कि शॉल पॉलिएस्टर के थे और रेशम उत्पादों पर लगने वाला अनिवार्य होलोग्राम भी नदारद था। चौंकाने वाली बात यह भी रही कि एक ही फर्म और उसकी सहयोगी कंपनियों ने वर्षों तक कपड़े की बड़ी मात्रा में सप्लाई की थी। रिपोर्ट के बाद TTD ने उस फर्म के सभी मौजूदा टेंडर रद्द कर दिए और मामले को राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के हवाले कर दिया। मंदिर में इससे पहले घी मिलावट और हुंडी गिनती चोरी जैसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जिसके चलते दुनिया के सबसे धनवान धार्मिक संस्थानों में से एक के प्रबंधन और निगरानी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।