एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेजा है। इस पत्र में 5 किलो फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति और वितरण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मकसद उन लोगों तक गैस पहुंचाना है, जिनके पास स्थायी पता नहीं है और जो अब तक इस सुविधा से वंचित थे।
किसे मिलेगा सीधा फायदा
इस फैसले से प्रवासी मजदूरों, छात्रों और दिहाड़ी कामगारों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। ये लोग अब सिर्फ वैध पहचान पत्र दिखाकर सिलेंडर खरीद सकेंगे। उन्हें एड्रेस प्रूफ देने की जरूरत नहीं होगी, जिससे गैस लेना आसान हो जाएगा। इससे उन लोगों की बड़ी समस्या हल होगी, जो बार-बार जगह बदलते रहते हैं।
दैनिक आपूर्ति हुई दोगुनी
सरकार ने 5 किलो सिलेंडर की रोजाना आपूर्ति को दोगुना कर दिया है। यह फैसला हाल के दिनों में प्रवासी मजदूरों को दी जा रही औसत आपूर्ति के आधार पर लिया गया है। इससे उम्मीद है कि जरूरतमंद लोगों को पर्याप्त मात्रा में गैस मिल सकेगी और किसी तरह की कमी नहीं होगी।
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राज्य सरकारों की बड़ी जिम्मेदारी
इन अतिरिक्त सिलेंडरों की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और उनके खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों को दी गई है। राज्य सरकारें तेल कंपनियों की मदद से यह सुनिश्चित करेंगी कि सिलेंडर सही लोगों तक पहुंचे। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इनका उपयोग सिर्फ प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंदों के लिए ही किया जाए।
वैध पहचान पत्र से खरीद संभव
सरकार ने साफ किया है कि ये सिलेंडर बाजार दर पर उपलब्ध होंगे और इन्हें खरीदने के लिए केवल वैध पहचान पत्र की जरूरत होगी। आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसे दस्तावेज दिखाकर कोई भी व्यक्ति नजदीकी गैस एजेंसी से सिलेंडर ले सकता है। इससे बिना पते वाले लोगों के लिए सुविधा और आसान हो जाएगी।
ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती
सरकार ने राज्यों को यह भी निर्देश दिया है कि सिलेंडरों के वितरण में पारदर्शिता रखी जाए और किसी भी तरह की कालाबाजारी को रोका जाए। प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है ताकि कोई भी व्यक्ति इस योजना का गलत फायदा न उठा सके। इस फैसले को प्रवासी मजदूरों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे संकट के समय उन्हें काफी सहारा मिलेगा।