लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले से जुड़े 6800 अभ्यर्थियों की सूची में शामिल उम्मीदवारों ने रविवार को राज्य शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद कार्यालय के सामने स्थित मैदान में बैठक कर अपनी आगे की रणनीति तय की। बैठक में शामिल हुए सभी अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर अपनी नियुक्ति की मांग को मजबूती से उठाने का निर्णय लिया।
अभ्यर्थियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि 19 मार्च को होने वाली सुनवाई से पहले वे विभागीय अधिकारियों और संबंधित मंत्री से मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि 6800 अभ्यर्थियों की सूची से जुड़े मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर माननीय सुप्रीम कोर्ट में रखा जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके। अभ्यर्थियों का मानना है कि लंबे समय से वे न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब और देरी उनके साथ अन्याय होगी।
बैठक में अपनी बात रखते हुए देवरिया निवासी धनंजय गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2020 में 69000 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत उनकी नियुक्ति हो जानी चाहिए थी, लेकिन आरक्षण संबंधी विसंगतियों के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि सरकार ने विस्तृत जांच के बाद 6800 अभ्यर्थियों की एक सूची जारी की थी, जिससे उम्मीद जगी थी कि अब नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। हालांकि मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण नियुक्ति अब तक संभव नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि यदि इस सूची के आधार पर भी नियुक्ति नहीं दी जाती है, तो यह अभ्यर्थियों के साथ दोहरा अन्याय और अपमान होगा।
बैठक में उपस्थित रायबरेली निवासी कृष्णा चंदन ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के अनुपालन में हुई त्रुटियों को दूर करने के लिए ही सरकार ने 6800 की सूची जारी की थी। यह सूची आरक्षण मानकों को पूरा करती है और विधिसम्मत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट में इस सूची का मजबूती से पक्ष रखा जाए और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए।