7 November 2026 Panchang: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के साथ शनिवार, 7 नवंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन धन्वंतरि जयंती के साथ नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली का पर्व भी मनाया जाएगा। इसके अलावा हनुमान जयंती का संयोग भी बन रहा है। शनिवार सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक त्रयोदशी तिथि रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। ऐसे में आइए जानते हैं शनिवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिनभर के अन्य महत्वपूर्ण समय।
7 नवंबर 2026 का पंचांग
शनिवार को कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 10 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। प्रीति योग देर रात 3 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। वहीं चित्रा नक्षत्र रविवार सुबह 5 बजकर 53 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, सुबह 10:49 बजे तक। इसके बाद चतुर्दशी।
नक्षत्र: चित्रा, रविवार सुबह 5:53 बजे तक।
योग: प्रीति योग, देर रात 3:28 बजे तक।
दिन: शनिवार।
पर्व: नरक चतुर्दशी, छोटी दिवाली, हनुमान जयंती और धन्वंतरि जयंती।
नरक चतुर्दशी 2026 के शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस साल नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान के लिए सुबह का समय विशेष रहेगा। इस दौरान तेल से मालिश करने के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है।
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2026, सुबह 10:47 बजे।
चतुर्दशी तिथि समाप्त: 8 नवंबर 2026, सुबह 11:27 बजे।
अभ्यंग स्नान का समय: सुबह 5:41 बजे से 6:38 बजे तक।
चंद्रोदय का समय: सुबह 5:41 बजे।
7 नवंबर 2026 को अलग-अलग शहरों में राहुकाल
शनिवार को राहुकाल का समय शहर के अनुसार अलग-अलग रहेगा। इस दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचने की धार्मिक मान्यता है।
दिल्ली: सुबह 9:21 से 10:43 बजे तक।
मुंबई: सुबह 9:32 से 10:57 बजे तक।
चंडीगढ़: सुबह 9:25 से 10:45 बजे तक।
लखनऊ: सुबह 9:05 से 10:28 बजे तक।
भोपाल: सुबह 9:16 से 10:40 बजे तक।
कोलकाता: सुबह 8:32 से 9:56 बजे तक।
अहमदाबाद: सुबह 9:35 से 10:59 बजे तक।
चेन्नई: सुबह 8:59 से 10:26 बजे तक।
सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
7 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5 बजकर 32 मिनट पर होगा।
क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?
दीपावली से ठीक एक दिन पहले पड़ने वाली कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इसे रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसी वजह से इस तिथि को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक,नरक चतुर्दशी पर तेल में माता लक्ष्मी और जल में मां गंगा का वास होता है। इसलिए स्नान से पहले शरीर पर तेल की मालिश करना और फिर पवित्र स्नान करना शुभ माना जाता है। कई घरों में तेल मालिश के साथ उबटन लगाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
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नरक चतुर्दशी पर चार दीपक जलाने की परंपरा
नरक चतुर्दशी की शाम दीपदान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन नरकासुर के निमित्त चार दीपक जलाने की मान्यता है। इन्हें घर की दक्षिण दिशा में प्रज्वलित किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से नकारात्मकता दूर होती है और परिवार पर सुख-समृद्धि बनी रहती है। भविष्योत्तर पुराण में भी इस दिन अलग-अलग स्थानों पर दीप प्रज्वलित करने का उल्लेख मिलता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, देवी-देवताओं के मंदिरों, मठों, अस्त्र-शस्त्र रखने के स्थानों, बगीचों, घर के आंगन और नदियों के किनारे दीपक जलाना शुभ माना गया है। इस तरह नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान और दीपदान करने से जुड़ी परंपराएं जीवन में शुद्धता, सकारात्मकता और खुशहाली का संदेश देती हैं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।