दिल्ली पुलिस का अधिकारी बनकर फोन करने वाले ठगों ने डीटीसी से सेवानिवृत्त 70 वर्षीय बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 9 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग और पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ते हुए सात साल की सजा की धमकी दी और पूरी रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। पीड़ित कृष्णा कुमार, बवाना की ईश्वर कॉलोनी में परिवार के साथ रहते हैं। उन्होंने बाहरी-उत्तरी जिला साइबर थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपितों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है।
आकाश शर्मा बताया और बैज नंबर भी साझा
शिकायत के मुताबिक 28 दिसंबर को दोपहर करीब दो बजे कृष्णा कुमार के मोबाइल पर व्हाट्सएप वॉयस कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस मुख्यालय से सीनियर इंस्पेक्टर आकाश शर्मा बताया और बैज नंबर भी साझा किया। इसके बाद कॉल को कथित रूप से एक अन्य अधिकारी इंस्पेक्टर प्रेम कुमार गौतम को ट्रांसफर कर दिया गया। दूसरे आरोपी ने दावा किया कि कृष्णा कुमार का मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है और उसका संबंध पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ा गया है। ठग ने कहा कि मामले में मनी ट्रायल चल रही है और दोषी पाए जाने पर सात साल की सजा हो सकती है।
फर्जी वारंट व्हाट्सएप पर भेज दिया गया
पीड़ित ने बताया कि डर के माहौल में वीडियो कॉल पर उनसे आधार कार्ड मंगवाया गया और किसी को भी कुछ न बताने के लिए कहा गया। अगले दिन आरोपी ने दोबारा वीडियो कॉल कर दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और उसका फर्जी वारंट व्हाट्सएप पर भेज दिया गया।
डर के चलते बुजुर्ग ने रुपये भेज दिए
ठगों ने बुजुर्ग को यह कहकर लगातार वीडियो कॉल पर रखा कि उनकी सुरक्षा के लिए निगरानी जरूरी है। 30 दिसंबर को आरोपित ने उन्हें पोस्ट ऑफिस में जमा 9 लाख रुपये की एफडी तुड़वाकर अपने बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा। दबाव और डर के चलते बुजुर्ग ने रुपये भेज दिए।जांच में जुटी पुलिस ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और ठगों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।