71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा ने मध्यप्रदेश को गर्व से भर दिया है। मुरैना निवासी आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘12वीं फेल’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। वहीं सतना के लेखक अशोक मिश्रा और निर्देशक यशोवर्धन मिश्रा की फिल्म ‘कटहल’ को सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म का अवार्ड मिला है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फिल्म निर्माताओं और टीम को बधाई देते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है।
'12वीं फेल' को मिला सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान
राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी मनोज कुमार शर्मा की प्रेरणादायक कहानी को दर्शाती फिल्म ‘12वीं फेल’ को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के खिताब से नवाजा गया है। मनोज शर्मा ने मुरैना जिले से संघर्ष की शुरुआत की और असफलताओं को मात देकर मेहनत से आईपीएस बने। उनकी जीवन यात्रा युवाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने फिल्म को मिले पुरस्कार पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, यह केवल संघर्ष और तपस्या से मिलती है। मनोज शर्मा का जीवन इस बात का उदाहरण है कि परिश्रम से सब कुछ संभव है।" उन्होंने फिल्म की पूरी टीम को इस सम्मान के लिए बधाई दी।
‘कटहल’ बनी वर्ष 2023 की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म
मध्यप्रदेश के सतना जिले से जुड़ी एक और फिल्म ‘कटहल’ को सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। यह फिल्म सामाजिक व्यंग्य के माध्यम से एक अलग कहानी को दर्शकों तक पहुंचाती है। इसकी पटकथा लेखक अशोक मिश्रा ने लिखी है, जबकि निर्देशन उनके पुत्र यशोवर्धन मिश्रा ने किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "यह पुरस्कार मध्यप्रदेश की रचनात्मक प्रतिभा और सामाजिक चेतना को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने जैसा है।" उन्होंने फिल्म की टीम को शुभकामनाएं दीं और भविष्य में भी ऐसे प्रयास करते रहने की कामना की।
प्रदेश के गौरव को मिला नया मुकाम
इन दोनों फिल्मों की सफलता ने न केवल फिल्म निर्माताओं का उत्साह बढ़ाया है, बल्कि मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त पहचान भी दिलाई है। इस उपलब्धि से यह भी साबित हुआ है कि कहानियों की ताकत और स्थानीय प्रतिभाएं मिलकर विश्वस्तरीय पहचान बना सकती हैं।