उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के 8वें दिन बुधवार को सदन में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। किसानों को मुफ्त बिजली नहीं देने के मुद्दे पर चर्चा के दौरान सपा विधायकों ने सरकार पर निशाना साधा, जिसके जवाब में स्पीकर सतीश महाना ने कई बार हस्तक्षेप किया। साथ ही, अफसरों द्वारा विधायकों के फोन न उठाने के गंभीर मुद्दे पर स्पीकर ने साफ निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान जरूरी है।
दोस्ती बाहर निभाइए, एडजस्ट कर लीजिए
सपा विधायक अतुल प्रधान ने सिंचाई के लिए किसानों को मुफ्त बिजली न देने का मामला उठाया। उन्होंने बिजली मंत्री के आंकड़ों पर सवाल किया और कहा कि मंत्री झूठ बोल रहे हैं। 'झूठ' शब्द पर स्पीकर सतीश महाना ने तुरंत आपत्ति जताई और विधायक को टोका, "दोस्ती बाहर निभाइए।" इसी दौरान सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने भी मंत्री पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। स्पीकर ने शिवपाल से कहा, "एडजस्ट कर लीजिए।" सपा विधायक ओम प्रकाश सिंह भी बिजली मंत्री के आंकड़ों पर आपत्ति जताते हुए खड़े हो गए, जिस पर स्पीकर ने टिप्पणी की, क्या आपका पर्सनल मामला है? आप किसी के खिलाफ नहीं खड़े होते, लेकिन मंत्री के खिलाफ तुरंत खड़े हो जाते हैं। इस दौरान सदन में हंगामा बढ़ा, लेकिन स्पीकर ने स्थिति संभाली।
अफसरों द्वारा फोन न उठाने पर स्पीकर का सख्त रुख
सदन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठा जब विधायकों ने शिकायत की कि अधिकारी उनके फोन नहीं उठाते, जिससे जनहित के कार्य प्रभावित होते हैं। स्पीकर सतीश महाना ने इसे गलत ठहराया और स्पष्ट कहा, "यह गलत है। जनप्रतिनिधि अगर जनहित के कार्यों के लिए फोन करते हैं तो अफसर को न केवल फोन रिसीव करना होगा बल्कि उचित सम्मान भी देना है। स्पीकर ने इस मुद्दे पर सख्त निर्देश देने की बात कही, ताकि विधायकों की शिकायतों का तुरंत समाधान हो सके। यह टिप्पणी सदन में सर्वसम्मति से स्वागत की गई, क्योंकि यह जनप्रतिनिधियों की गरिमा से जुड़ा मुद्दा है।