8th Pay Commission Bonus : दिवाली से पहले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बोनस को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बोनस की गणना का मौजूदा तरीका अब पुराना हो चुका है। 8वें वेतन आयोग की तैयारियों के बीच मांग उठ रही है कि बोनस की गणना वास्तविक मूल वेतन के आधार पर की जाए, जिससे कर्मचारियों को अधिक लाभ मिल सके।
क्या है मौजूदा व्यवस्था?
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस और प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस की गणना 7,000 रुपये की तय सीमा के आधार पर होती है। यानी किसी कर्मचारी का मूल वेतन 18,000 रुपये या उससे अधिक होने पर भी बोनस निकालते समय केवल 7,000 रुपये को आधार माना जाता है। इसी वजह से बोनस राशि सीमित रह जाती है।
कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 7,000 रुपये की सीमा को समाप्त किया जाए। उनकी मांग है कि बोनस की गणना कम से कम मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये पर की जाए। आगे चलकर यदि 8वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन बढ़ता है तो बोनस भी उसी के अनुरूप तय किया जाए।
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कितना बढ़ सकता है बोनस?
मौजूदा व्यवस्था में 30 दिन के बोनस पर कर्मचारी को लगभग 6,900 से 7,000 रुपये तक मिलते हैं। यदि गणना 18,000 रुपये के मूल वेतन पर की जाए तो यही राशि बढ़कर लगभग 17,700 रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं 8वें वेतन आयोग के बाद यदि न्यूनतम मूल वेतन 26,000 से 34,500 रुपये के बीच तय होता है, तो बोनस 25,000 रुपये से अधिक हो सकता है।
किन कर्मचारियों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
रेलवे, डाक विभाग, आयुध कारखानों और विभिन्न मंत्रालयों में कार्यरत ग्रुप ‘सी’ तथा अराजपत्रित ग्रुप ‘बी’ कर्मचारियों को इसका सबसे अधिक लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जा सकता है, यदि गणना की सीमा बदली जाती है।
अभी क्या है स्थिति?
फिलहाल बोनस फॉर्मूले में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यह कर्मचारी संगठनों की मांग और संभावित प्रस्तावों पर आधारित चर्चा है। अंतिम फैसला केंद्र सरकार और भविष्य में गठित होने वाले 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही सामने आएगा। ऐसे में लाखों कर्मचारियों की नजर अब आने वाले फैसलों पर टिकी हुई है।