सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर जबरदस्त चर्चा है। 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है और अब सबकी नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। कर्मचारियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सैलरी कितनी बढ़ेगी और एरियर कितना मिलेगा। खास तौर पर लेवल 1 से 5 तक के कर्मचारी फिटमेंट फैक्टर को लेकर लगातार हिसाब-किताब लगा रहे हैं।
फिटमेंट फैक्टर क्या होता है और क्यों जरूरी है
वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है। आसान शब्दों में कहें तो पुरानी बेसिक सैलरी को इसी फैक्टर से गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय होती है। 7वें वेतन आयोग में यह फैक्टर 2.57 था। अब 8वें वेतन आयोग में इसके 2.0 से लेकर 2.57 तक रहने की चर्चा है। जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर होगा, उतनी ज्यादा सैलरी और एरियर मिलेगा।
1 जनवरी 2026 से मिलेगा फायदा
जानकारों के मुताबिक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें भले ही 2027 में लागू हों, लेकिन सैलरी का असर 1 जनवरी 2026 से माना जाएगा। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को पिछली तारीख से बढ़ी हुई सैलरी का एरियर मिलेगा। अगर सिफारिशें देर से लागू होती हैं, तो 12 से 24 महीने तक का एरियर बनने की पूरी संभावना है।
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लेवल 1 से 5 की मौजूदा और नई बेसिक सैलरी
फिलहाल 7वें वेतन आयोग में लेवल 1 की बेसिक सैलरी 18000 रुपये है, लेवल 2 में 19900, लेवल 3 में 21700, लेवल 4 में 25500 और लेवल 5 में 29200 रुपये है। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.57 लागू होता है, तो लेवल 1 की सैलरी करीब 46260 रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं लेवल 5 की बेसिक सैलरी बढ़कर करीब 75000 रुपये से ज्यादा हो सकती है।
हर महीने और एरियर में कितना फायदा
मासिक बढ़ोतरी की बात करें तो लेवल 1 के कर्मचारी को हर महीने करीब 28000 रुपये तक ज्यादा मिल सकते हैं। लेवल 5 में यह बढ़ोतरी 45000 रुपये के आसपास पहुंच सकती है। अगर 20 महीने का एरियर जोड़ा जाए तो लेवल 1 को करीब 5.5 लाख रुपये तक मिल सकते हैं, जबकि लेवल 5 के कर्मचारियों के लिए यह रकम 9 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है।
DA और HRA को लेकर क्या है नियम
पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो डीए का एरियर आमतौर पर दिया जाता है और यह नई बेसिक सैलरी के हिसाब से जुड़ता है। हालांकि HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस का एरियर आमतौर पर नहीं मिलता, जब तक सरकार अलग से कोई आदेश न दे। कुल मिलाकर साफ है कि फिटमेंट फैक्टर जितना बड़ा होगा, कर्मचारियों की जेब में उतना ही बड़ा फायदा आएगा।