दिल्ली में 8वां वेतन आयोग और कर्मचारी संगठनों के बीच चल रही अहम बैठक का आज आखिरी दिन है। जनपथ स्थित चंद्रलोक बिल्डिंग में यह चर्चा कई चरणों में हुई, जहां लाखों कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया। शुरुआती दौर में दोनों पक्षों ने अपने-अपने पक्ष रखे, लेकिन अब नजर अंतिम संकेतों पर टिकी है।
कर्मचारी संगठनों ने रखीं मांगें
बैठक में नेशनल काउंसिल जेसीएम और अन्य यूनियनों ने कई अहम मांगें सामने रखीं। इसमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को 18000 रुपये से बढ़ाकर 69000 या उससे अधिक करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, सालाना इंक्रीमेंट 3 प्रतिशत से 6 प्रतिशत करने और पुरानी पेंशन योजना लागू करने की भी जोरदार मांग उठी है।
पेंशन और भत्तों पर जोर
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पेंशन को अंतिम वेतन का 67 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा हाउस रेंट अलाउंस को शहरों के हिसाब से 40%, 35% और 30% करने की मांग भी सामने आई है। यूनियनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह बदलाव जरूरी है।
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प्रमोशन और समीक्षा की मांग
बैठक में कर्मचारियों ने 30 साल की सेवा के दौरान कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित करने की बात भी रखी है। साथ ही वेतन आयोग को हर 10 साल की बजाय 5 साल में लागू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि समय के साथ वेतन में सुधार होता रहे।
सरकार ने बढ़ाई समयसीमा
सरकार ने इस बीच सुझाव और ज्ञापन जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है। इससे कर्मचारी संगठनों को अपनी मांगों को और विस्तार से रखने का मौका मिलेगा। पहले यह तारीख 30 अप्रैल तय थी, जिसे अब आगे बढ़ा दिया गया है।
क्या पूरी होंगी मांगें?
फिलहाल आयोग अभी विचार-विमर्श के चरण में है और अंतिम फैसला सरकार की आर्थिक स्थिति और सिफारिशों पर निर्भर करेगा। ऐसे में सभी मांगों के एक साथ पूरा होने की संभावना कम मानी जा रही है, लेकिन कुछ अहम राहत मिलने की उम्मीद जरूर बनी हुई है।