8th Pay Commission Pension Rule : 8वें वेतन आयोग के सामने केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई मुद्दे रखे जा रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा कम्युटेड पेंशन की बहाली अवधि को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि मौजूदा 15 साल का नियम बदला जाए, क्योंकि यह अब व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है।
क्या होता है कम्युटेड पेंशन?
रिटायरमेंट के समय सरकारी कर्मचारी अपनी बेसिक पेंशन का अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त राशि के रूप में ले सकते हैं। इसे कम्युटेड पेंशन कहा जाता है। इसके बदले हर महीने मिलने वाली पेंशन से उस हिस्से की कटौती की जाती है। वर्तमान नियम के अनुसार यह कटौती 15 साल तक जारी रहती है और उसके बाद पूरी पेंशन बहाल होती है।
40 साल पुराने नियम पर क्यों उठ रहे सवाल?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सरकार रिटायरमेंट के समय केवल लगभग 8 साल 2 महीने यानी 98 महीनों की राशि एडवांस देती है। लेकिन इसकी वसूली 15 साल यानी 180 महीनों तक की जाती है। ऐसे में पेंशनर्स को लंबे समय तक कम पेंशन मिलने की स्थिति का सामना करना पड़ता है।
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कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी समेत कई कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि पेंशन बहाली की अवधि 15 साल से घटाकर 10 से 12 साल कर दी जाए। उनका तर्क है कि ब्याज समेत सरकार की राशि 11–12 साल में ही वापस हो जाती है, इसलिए अतिरिक्त वर्षों तक कटौती जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
100 रुपये वाले उदाहरण से समझिए पूरा मामला
उदाहरण के तौर पर यदि कोई कर्मचारी 100 रुपये मासिक पेंशन कम्युट करता है, तो उसे रिटायरमेंट के समय करीब 9,833 रुपये एकमुश्त मिलते हैं। इसके बाद उसकी मासिक पेंशन से 100 रुपये की कटौती शुरू हो जाती है। 10 साल में ही कुल 12,000 रुपये की कटौती हो जाती है, जो दी गई राशि से अधिक है। इसी आधार पर कर्मचारी संगठन नियम में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
अगर नियम बदला तो क्या होगा फायदा?
यदि 8वां वेतन आयोग इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो लाखों केंद्रीय पेंशनर्स को फायदा मिल सकता है। पेंशन की पूरी बहाली जल्दी हो जाएगी, जिससे रिटायर लोगों की मासिक आय पहले की तुलना में जल्दी बढ़ सकेगी। इससे बुजुर्ग पेंशनर्स पर आर्थिक दबाव भी कम होगा।