केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर नई हलचल शुरू हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% किया जाए। एनसी-जेसीएम ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह बदलाव जरूरी है। अगर सरकार इस मांग को मान लेती है, तो कर्मचारियों को हर साल मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी का फायदा दोगुना हो सकता है।
फिटमेंट फैक्टर से बढ़ेगा बेसिक पे
7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग रखी गई है। इस बदलाव से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सीधा असर शुरुआती वेतन से लेकर उच्च स्तर के वेतन तक पड़ेगा।
लेवल-1 से लेवल-10 तक सैलरी का अनुमान
अगर 3.83 फिटमेंट फैक्टर और 6% इंक्रीमेंट लागू होता है, तो लेवल-1 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 73,000 रुपये तक पहुंच सकती है। लेवल-4 पर यह सैलरी लगभग 1,03,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं लेवल-7 के कर्मचारियों की सैलरी 1,82,000 रुपये के आसपास हो सकती है। लेवल-10 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी 2,27,000 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
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भत्तों में भी होगा बड़ा फायदा
बेसिक सैलरी बढ़ने का असर सीधे भत्तों पर भी पड़ेगा। महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और ट्रांसपोर्ट अलाउंस सभी बेसिक पे के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में बेसिक बढ़ने के साथ इन सभी भत्तों में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे कर्मचारियों की कुल इनकम में बड़ा बदलाव आएगा।
2026 से लागू होने की उम्मीद
आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू होता है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था, इसलिए कर्मचारियों की मांग है कि 8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू किया जाए।
अन्य बड़ी मांगें भी शामिल
कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को 69,000 रुपये करने, एचआरए को 30% से बढ़ाकर 40% करने और पेंशन नियमों में सुधार की भी मांग की है। इसके अलावा 18 पे-लेवल की जगह 7 बड़े पे-स्केल बनाने का सुझाव भी दिया गया है।
अभी प्रस्ताव, फैसला बाकी
फिलहाल ये सभी आंकड़े और प्रस्ताव कर्मचारियों की मांग पर आधारित हैं। सरकार की ओर से अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन अगर इनमें से कुछ भी लागू होता है, तो 2026 से कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।