8th Pay Commission : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। देशभर में आयोग की बैठकों का दौर जारी है, लेकिन वेतन और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस बीच ऑल इंडिया एनपीएस फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने एक नया आकलन पेश किया है, जिसने कर्मचारियों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है।
2.10 फिटमेंट फैक्टर का गणित
डॉ. मंजीत पटेल का कहना है कि यदि 8वें वेतन आयोग में 2.10 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो वेतन और पेंशन में लगभग 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। उनके अनुसार 7वें वेतन आयोग के समय 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ था, जबकि इस बार परिस्थितियां अलग हैं। उन्होंने 100 रुपये के मूल वेतन के आधार पर उदाहरण देते हुए बताया कि वास्तविक बढ़ोतरी का प्रतिशत पहले की तुलना में सीमित रह सकता है।
कैसे निकला 31 प्रतिशत का आंकड़ा?
आकलन के मुताबिक यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 100 रुपये माना जाए और उस पर 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता जुड़ जाए तो कुल राशि 160 रुपये बनती है। यदि इस पर 2.10 फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए तो वेतन 210 रुपये पहुंचता है। यानी कुल बढ़ोतरी 50 रुपये की होती है, जो करीब 31.25 प्रतिशत के बराबर बैठती है। इसी आधार पर पेंशन में भी समान अनुपात की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है।
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अलग-अलग स्तर पर कितना बढ़ सकता है वेतन?
गणना के अनुसार लेवल-1 के कर्मचारी की शुरुआती बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 37,728 रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं लेवल-5 के कर्मचारियों का वेतन करीब 61,203 रुपये और लेवल-10 के कर्मचारियों का वेतन लगभग 1.18 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उच्च स्तर के अधिकारियों में लेवल-14 का वेतन 3 लाख रुपये से अधिक और लेवल-18 का वेतन 5.24 लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकता है।
संगठनों की क्या है मांग?
कर्मचारी संगठनों की मांग इससे कहीं ज्यादा है। एनसी-जेसीएम स्टाफ साइड, एआईएनपीएसईएफ, एआईडीईएफ और भारत पेंशनर्स समाज जैसे संगठन 3.833 फिटमेंट फैक्टर और 69,000 रुपये न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं। वहीं रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ ने 2.92 फिटमेंट फैक्टर और 52,560 रुपये न्यूनतम वेतन का प्रस्ताव दिया है।
अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों पर
फिलहाल यह सभी आंकड़े और प्रस्ताव केवल अनुमान और मांगों के स्तर पर हैं। 8वां वेतन आयोग देशभर से मिले सुझावों और आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा। ऐसे में कर्मचारियों और पेंशनर्स को वास्तविक वेतन वृद्धि का इंतजार आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने तक करना होगा।