साल 2026 की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारियों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है आखिर सैलरी कब बढ़ेगी। देश के करीब 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स आठवें वेतन आयोग से जुड़ी खबरों पर नजर बनाए हुए हैं। हर नए साल के साथ उम्मीद बढ़ती है कि अब वेतन में इजाफे की घोषणा होगी, लेकिन फिलहाल सरकार की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसी वजह से कर्मचारियों के बीच उत्सुकता के साथ-साथ असमंजस भी बना हुआ है।
अब तक क्या-क्या हुआ प्रक्रिया में
पिछले ट्रेंड पर नजर डालें तो वेतन आयोग की प्रक्रिया लंबी और चरणबद्ध होती है। सरकार ने 15 जनवरी 2025 को आठवें वेतन आयोग के गठन का ऐलान जरूर कर दिया था, लेकिन इसके बाद रफ्तार धीमी रही। करीब 10 महीने बाद, 28 अक्टूबर 2025 को इसका आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। इस नोटिफिकेशन में आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने और सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। यहीं से कर्मचारियों को अंदाजा लगने लगा कि वेतन बढ़ोतरी में अभी वक्त लगेगा।
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कब तक लागू हो सकती हैं सिफारिशें
अगर अक्टूबर 2025 से 18 महीने की समयसीमा जोड़ी जाए, तो आयोग की रिपोर्ट जुलाई 2027 तक आने की संभावना बनती है। इसके बाद भी सिफारिशें तुरंत लागू नहीं होतीं। रिपोर्ट आने के बाद सरकार, वित्त मंत्रालय और फिर कैबिनेट स्तर पर विचार-विमर्श होता है। इस पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर 5 से 6 महीने का समय और लग जाता है। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए यही अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़े हुए वेतन का लाभ कर्मचारियों को 2027 के मध्य या अंत तक मिल सकता है, जबकि कुछ मामलों में यह 2028 की शुरुआत तक भी खिंच सकता है।
देरी के पीछे क्या है असली वजह
वेतन आयोग की देरी की सबसे बड़ी वजह उसकी विस्तृत प्रक्रिया है। आयोग को सभी विभागों, कर्मचारियों की श्रेणियों, भत्तों, महंगाई और सरकारी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। इसके बाद सरकार को सिफारिशों का बजट पर असर देखना होता है। यही कारण है कि वेतन आयोग बनने और नई सैलरी लागू होने के बीच करीब दो साल का अंतर सामान्य माना जाता है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारी यही उम्मीद लगाए बैठे हैं कि लंबा इंतजार जरूर है, लेकिन जब बढ़ोतरी होगी तो उसका असर सैलरी और पेंशन दोनों में साफ नजर आएगा।