9 November 2026 Panchang: सोमवार को कार्तिक अमावस्या के स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा। आज विशाखा नक्षत्र और सौभाग्य योग का संयोग भी बन रहा है। इसके अलावा आज बलि प्रतिपदा का पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। अगर आप आज कोई शुभ काम करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले जान लें दिनभर के शुभ-अशुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का पूरा विवरण।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 9 नवंबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी। आज सोमवार होने के कारण इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। वहीं विशाखा नक्षत्र अगले दिन सुबह 9 बजकर 20 मिनट तक प्रभावी रहेगा। सौभाग्य योग देर रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। आइए जानते हैं सोमवार का पूरा पंचांग।
9 नवंबर 2026 का पंचांग
.वार: सोमवार
.तिथि: कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या, दोपहर 12:32 बजे तक
.नक्षत्र: विशाखा, अगले दिन सुबह 9:20 बजे तक
.योग: सौभाग्य योग, देर रात 2:57 बजे तक
.पर्व: बलि प्रतिपदा
.पक्ष: कृष्ण पक्ष के बाद शुक्ल पक्ष
9 नवंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
दिन की शुरुआत पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए सही समय देखकर करना चाहते हैं, तो इन मुहूर्तों का ध्यान रखें।
मुहूर्त समय
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:54 से 5:46 बजे तक
प्रातः संध्या सुबह 5:20 से 6:38 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:46 से दोपहर 12:30 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 5:38 से 6:04 बजे तक
सायाह्न संध्या शाम 5:38 से 6:56 बजे तक
अलग-अलग शहरों में राहुकाल का समय
ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ अवधि माना जाता है। इस दौरान नए और मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। 9 नवंबर को प्रमुख शहरों में राहुकाल का समय इस प्रकार रहेगा।
शहर राहुकाल
दिल्ली सुबह 8:01 से 9:22 बजे तक
मुंबई सुबह 8:08 से 9:33 बजे तक
चंडीगढ़ सुबह 8:05 से 9:25 बजे तक
लखनऊ सुबह 7:44 से 9:06 बजे तक
भोपाल सुबह 7:54 से 9:17 बजे तक
कोलकाता सुबह 7:09 से 8:33 बजे तक
अहमदाबाद सुबह 8:13 से 9:36 बजे तक
चेन्नई सुबह 7:32 से 8:59 बजे तक
9 नवंबर को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
.सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 38 मिनट
.सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 30 मिनट
क्या है बलि प्रतिपदा का धार्मिक महत्व?
कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को बलि प्रतिपदा के रूप में मनाया जाता है। इसे बलि पड़वा भी कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से राजा बलि और भगवान विष्णु से जुड़ी पौराणिक कथा के लिए जाना जाता है। कई स्थानों पर इस अवसर पर गुजराती और मारवाड़ी नववर्ष की शुरुआत भी होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा बलि अपनी दानशीलता और वचन निभाने के लिए प्रसिद्ध थे। भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण करके उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी थी। राजा बलि ने अपना वचन पूरा किया और भगवान को तीनों पग भूमि देने के लिए तैयार हो गए। उनकी निष्ठा और उदारता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें विशेष वरदान दिया। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन राजा बलि पृथ्वी लोक पर आते हैं। इसी विश्वास के साथ लोग उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ परंपराओं में घर के आंगन में पांच रंगों से राजा बलि और उनकी पत्नी विंध्यावली की आकृति बनाकर पूजन किया जाता है।
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इसी दिन देश के कई हिस्सों में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन भी होता है। मंदिरों में भगवान को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है और भक्तों के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। इस तरह बलि प्रतिपदा का दिन धार्मिक आस्था, दान-पुण्य और नए साल के उत्साह से जुड़ा हुआ है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।