East Delhi News: राजधानी दिल्ली में साइबर ठगों ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए ठगी के नए-नए तरीके अपना रखे हैं। कहीं चलती एसयूवी कार को ही मोबाइल कॉल सेंटर बनाकर लोगों को ठगा जा रहा था, तो कहीं उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दिलाने का झांसा देकर तमिलनाडु के परिवारों को निशाना बनाया जा रहा था। पूर्वी जिला साइबर पुलिस ने दो अलग-अलग कार्रवाइयों में इन दोनों कथित साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट व मेट्रो कार्ड सहित बड़ी संख्या में वित्तीय दस्तावेज बरामद किए हैं। वहीं, दूसरे मामले में एक मोबाइल फोन से करीब 54 हजार लोगों का संपर्क डाटा मिला है।
ये चीजें हुई बरामद
पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार ने बताया कि , पहली कार्रवाई में साइबर ठगों ने मारुति सुजुकी ब्रेजा कार को ही चलता-फिरता कॉल सेंटर बना रखा था। आरोपी पुलिस की लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए लगातार जगह बदलते रहते थे। इस मामले में लोकेश तोमर (37), हिमांशु राठौर और तुषार (35) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कार के अलावा सात मोबाइल फोन, 15 बैंक, डेबिट व मेट्रो कार्ड, पांच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी प्रतियां, छह चेकबुक, तीन पासबुक, एक हस्ताक्षरित चेक, दो किरायानामे, 11 पासपोर्ट साइज फोटो और ग्राहकों की सूची वाले नौ पन्ने बरामद किए हैं। एक संदिग्ध एनपीसीआई मुहर भी मिली है।
पहला मामला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी नीलेश विश्वकर्मा की शिकायत से सामने आया। शिकायतकर्ता को बीमा पॉलिसियों में निवेश किए गए 45 लाख रुपये वापस दिलाने का भरोसा दिया गया। इसके लिए प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उससे करीब 65 हजार रुपये ठग लिए गए। शिकायत के आधार पर पूर्वी जिला साइबर थाने में एफआईआर नंबर 80/2026, बीएनएस की धारा 318(4)/112(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
रिपोर्टिंग पोर्टल पर संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई
जांच के दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई। हिमांशु राठौर से जुड़े इंडियन ओवरसीज बैंक खाते की जांच के बाद पुलिस ने कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की। तकनीकी निगरानी और जमीनी जांच के जरिए पुलिस टीम ने ओल्ड कोंडली इलाके में चलती ब्रेजा कार को रोककर आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस को शक है कि इन बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जा रहा था।
छात्रवृत्ति का लालच देकर तमिलनाडु के परिवारों को बनाया निशाना
राजीव कुमार ने बताया कि दूसरे मामले में साइबर पुलिस ने छात्रवृत्ति दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है। इस मामले में सचिन शर्मा (29) और सुमित को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सुमित के कब्जे से सैमसंग एस-26 मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसमें एक्सेल फाइलों के रूप में करीब 54 हजार लोगों के संपर्क विवरण मौजूद मिले। इनमें शिकायतकर्ता का नंबर भी शामिल था।
17,989 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए
यह मामला तमिलनाडु निवासी मुथु कुमार की शिकायत पर सामने आया। आरोप है कि उसे उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दिलाने का झांसा देकर एक सितंबर 2026 को ऑनलाइन करीब 17,989 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत के बाद बैंक खातों की जांच की गई तो ठगी की रकम बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में पहुंचने और पूर्वी दिल्ली के एटीएम से निकाले जाने का पता चला। इसके बाद साइबर थाने में एफआईआर नंबर 79/2026, बीएनएस की धारा 112(2)/318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने बैंक खाते के दस्तावेजों और एटीएम की सीसीटीवी फुटेज की जांच की। खाता शिवानी शर्मा के नाम पर था। सीसीटीवी फुटेज में रकम निकालते दिखाई दिए युवक की पहचान उसके भाई सचिन शर्मा के रूप में हुई। सचिन को 17 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि उसने अपनी बहन का एटीएम कार्ड और यूपीआई की जानकारी कमीशन के बदले सुमित को दी थी। उसने एटीएम से 10 हजार रुपये निकालने, आठ हजार रुपये यूपीआई के जरिए ट्रांसफर करने और तीन हजार रुपये कमीशन लेने की बात भी बताई।
सचिन से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 21 अक्टूबर को सुमित को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल फोन की जांच में व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई एक्सेल फाइलें मिलीं, जिनमें करीब 54 हजार लोगों का डाटा था। पुलिस के अनुसार, एक महिला और उसके सहयोगी तमिल भाषी परिवारों को निशाना बना रहे थे। खासतौर पर ऐसे परिवारों को छात्रवृत्ति का लालच दिया जाता था, जिनके बच्चे स्कूल की पढ़ाई पूरी कर उच्च शिक्षा में दाखिला लेना चाहते थे। आरोप है कि इसी डाटा के आधार पर लोगों से संपर्क कर उन्हें ऑनलाइन रकम भेजने के लिए प्रेरित किया जाता था। पुलिस अब उस महिला और उसके अन्य सहयोगियों की तलाश कर रही है।
कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच में दोनों मामलों में म्यूल बैंक खातों यानी ऐसे बैंक खातों के इस्तेमाल की आशंका सामने आई है, जिनके जरिए साइबर ठगी की रकम प्राप्त कर आगे भेजी जाती है। आरोप है कि कुछ लोग कमीशन के लालच में अपने या परिजनों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड और यूपीआई की जानकारी दूसरे लोगों को उपलब्ध करा रहे थे। पुलिस इन खातों के जरिए हुए लेनदेन और संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई की गई
दोनों मामलों में पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार, के नेतृत्व में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई की गई। पहले मामले में एसएचओ साइबर ईस्ट इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व में एसआई विनय कुमार, हेड कांस्टेबल देवेंद्र, हेड कांस्टेबल नितिन और महिला कांस्टेबल आंचल की टीम ने कार्रवाई की। पूरी जांच महावीर प्रसादएसीपी/ऑपरेशंस, ईस्ट जिला के निकट पर्यवेक्षण में की गई। वहीं, छात्रवृत्ति ठगी के मामले में एसएचओ इंस्पेक्टर पवन यादव के नेतृत्व और एसीपी/ऑपरेशंस ईस्ट महावीर प्रसाद की निगरानी में एसआई आजाद सिंह मलिक, हेड कांस्टेबल अनुज, हेड कांस्टेबल कुलदीप, कांस्टेबल लक्ष्मण और कांस्टेबल श्याम सुंदर की टीम ने बैंक खातों, एटीएम फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस की जनता से अपील
पूर्वी जिला पुलिस ने लोगों को बीमा रिफंड, निवेश पर भारी मुनाफे और छात्रवृत्ति दिलाने के नाम पर मांगी जाने वाली अग्रिम फीस से सावधान रहने की सलाह दी है। पुलिस ने कहा है कि किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी न दें। अपना बैंक खाता कमीशन के लालच में किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध न कराएं। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।