
Chhath Puja 2025: भारत की सांस्कृतिक धरोहरों में छठ पूजा का विशेष महत्व है — यह पर्व न केवल सूर्य उपासना का प्रतीक है, बल्कि आस्था, पर्यावरण और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम भी है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के समापन अवसर पर पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला। घाटों पर उमड़ी भक्तों की भीड़, गूंजते छठ गीत और दीपों की जगमगाहट ने मानो धरती पर स्वर्ग सा दृश्य सजा दिया।
पीएम मोदी ने दी सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई
छठ महापर्व के समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि छठ पूजा भारतीय संस्कृति की भव्यता और अध्यात्मिक गहराई का प्रतीक है, जहाँ सूर्य देव और छठी मइया की आराधना के माध्यम से लोग प्रकृति, परिवार और समाज के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं की भक्ति, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह पर्व "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" की भावना को और सशक्त बनाता है।
उज्ज्वल स्वरूप देखने को मिला
देश के विभिन्न हिस्सों से छठ पूजा के दृश्य सामने आए — गंगा घाटों से लेकर तालाबों और कृत्रिम जलाशयों तक, हर स्थान पर आस्था का वही उज्ज्वल स्वरूप देखने को मिला। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली और नेपाल तक में इस पर्व की भव्यता ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। महिलाएँ पारंपरिक व्रत का पालन करते हुए सूर्यास्त और सूर्योदय के समय अर्घ्य अर्पित करती दिखीं, वहीं परिवारजन गीतों और आराधना में लीन रहे।
पवित्रता के प्रति जागरूक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि ऐसे पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों की पवित्रता के प्रति जागरूक करते हैं। छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह मानव और प्रकृति के बीच संतुलन और सामंजस्य का जीवंत उदाहरण है। इस अवसर पर देश के अनेक नेताओं और राज्य सरकारों ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएँ दीं। सोशल मीडिया पर छठ पूजा की झलकियाँ और प्रधानमंत्री का संदेश तेजी से वायरल हो रहा है।
जीवंत संस्कृति का प्रतीक
छठ का यह पर्व न केवल भक्ति का उत्सव है, बल्कि यह भारत की उस जीवंत संस्कृति का प्रतीक भी है जो विविधता में एकता का संदेश देती है। भव्य परंपरा के इन दिव्य दर्शन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय आस्था और संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और अटूट हैं।