Varanasi News: काशी की संकरी गलियों और घाटों की रौनक अब महिला ई-रिक्शा चालकों से और चमकदार हो गई है। यहां की कुछ महिलाएं न केवल ई-रिक्शा चला रही हैं, बल्कि देशी-विदेशी पर्यटकों को काशी विश्वनाथ मंदिर, दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और सारनाथ जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन करा रही हैं। ये महिलाएं पर्यटन के जरिए न केवल अपनी आजीविका चला रही हैं, बल्कि घर का पूरा खर्च भी खुद उठा रही हैं।
'होली सिटी रिक्शा' पहल का हिस्सा
ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है अंजलो गोयल की, जो 'होली सिटी रिक्शा' पहल का हिस्सा हैं। यह पहल एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज नामक एनजीओ द्वारा शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य कम आय वाली महिलाओं को सशक्त बनाना है। अंजलो और उनकी साथी महिलाएं इलेक्ट्रिक रिक्शा चलाकर पर्यटकों को शहर घुमाती हैं। वे न केवल सुरक्षित यात्रा प्रदान करती हैं, बल्कि काशी की प्राचीन कहानियां, घाटों की आरती और स्थानीय व्यंजनों की जानकारी भी साझा करती हैं।
यह काशी का नया चेहरा है
विदेशी पर्यटक खासतौर पर इन महिला चालकों की मुस्कान और आत्मविश्वास से प्रभावित होते हैं। एक विदेशी पर्यटक ने कहा, महिला ड्राइवर और इलेक्ट्रिक रिक्शा, यह काशी का नया चेहरा है! यह पहल पर्यावरण अनुकूल भी है, क्योंकि इलेक्ट्रिक रिक्शा प्रदूषण मुक्त हैं। इन महिलाओं को ड्राइविंग, मेंटेनेंस और बिजनेस स्किल्स की ट्रेनिंग दी गई है। कई महिलाएं विधवा या कम आय वाले परिवारों से हैं, जो पहले घरेलू काम या मजदूरी पर निर्भर थीं। अब वे रोजाना 500-1000 रुपये कमा रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च आसानी से चल रहा है।
महिलाओं का नहीं डगमगाया हौसला
इंटरेपिड ट्रैवल जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी इस पहल से जुड़ रही हैं, जिससे विदेशी टूर ग्रुप इन महिला चालकों के रिक्शा में काशी दर्शन कर रहे हैं। समाज में शुरुआत में कुछ चुनौतियां आईं, जैसे लोगों की टिप्पणियां, लेकिन इन महिलाओं का हौसला नहीं डगमगाया। काशी की ये बेटियां साबित कर रही हैं कि सशक्तिकरण की राह पर चलकर न केवल खुद मजबूत बन रही हैं, बल्कि पर्यटन को नया आयाम भी दे रही हैं। उनकी कहानी प्रेरणा है उन तमाम महिलाओं के लिए जो सपनों को हकीकत में बदलना चाहती हैं।