पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट ज्ञानेंद्र सिंह यादव की अदालत ने सुनाया। न्यायालय के इस निर्णय को बाल अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।
मामला बाबूगढ़ थाना क्षेत्र का है
विशेष लोक अभियोजक हरेंद्र त्यागी के अनुसार, यह मामला बाबूगढ़ थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने अपनी तहरीर में बताया था कि उसकी पांच वर्षीय भतीजी उसके साथ रहती थी। 22 जून 2021 को बच्ची रोज की तरह पड़ोस में खेलने गई थी। कुछ देर बाद जब वह वापस लौटी, तो उसने बताया कि आरोपी गुरमेन्द्र उर्फ गुरविन्दर उसे बहाने से अपने घर की छत पर बने कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने तुरंत बाबूगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और मामले की जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया
मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में चल रही थी, जहां शनिवार को यह केस निर्णायक चरण में पहुंचा। सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने आरोपी को पोक्सो एक्ट की धारा 5-एम/6 के तहत 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त दो महीने का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
पीड़िता को पुनर्वास के लिए 1 लाख रुपये
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी द्वारा जमा की गई अर्थदंड की राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। इसके अलावा, पोक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हापुड़ द्वारा पीड़िता को पुनर्वास के लिए 1 लाख रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी।