RSS meeting was held in Haryana: हरियाणा में आयोजित तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के दौरान RSS (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने संगठन के विस्तार और कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को लेकर हो रहे विरोध पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की परंपरा रही है कि जीवित रहते हुए किसी का विरोध हो सकता है, लेकिन मृत्यु के बाद विरोध करना उचित नहीं माना जाता। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार का विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए।
देशभर में शाखाएं
होसबोले ने बताया कि संगठनात्मक रूप से संघ का विस्तार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अंडमान से लेकर अरुणाचल और लेह जैसे दूरदराज़ इलाकों तक संघ की शाखाएं संचालित हो रही हैं। दुर्गम क्षेत्रों में भी शाखाएं शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि संघ से जुड़ने वाले स्वयंसेवक पूरे देश को एक समग्र दृष्टि से देखते हैं और क्षेत्र, राज्य या जाति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हैं।
पंच परिवर्तन पर जोर
सरकार्यवाह ने कहा कि “पंच परिवर्तन” के विचार को समाज में लागू करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शाखाओं की गुणवत्ता बढ़ाना संघ की प्राथमिकताओं में शामिल है। साथ ही देश के बारे में सही और सकारात्मक जानकारी दुनिया तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उनका कहना था कि समाज में सज्जन शक्तियों को एक साथ लाकर सकारात्मक परिवर्तन लाना संगठन का उद्देश्य है।
#WATCH | Panipat, Haryana | RSS General Secretary Dattatreya Hosabale says, "On the occasion of the centenary of the Sangh this year, we had specifically deliberated on the programs for the centenary year... From an organisational perspective, we discussed the expansion of Sangh… pic.twitter.com/E1x8WofLz4
— ANI (@ANI) March 15, 2026
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युवा कार्यक्रम
होसबोले ने कहा कि औपनिवेशिक मानसिकता से समाज को मुक्त करना जरूरी है। इसके लिए विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाने की योजना बनाई गई है। संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान कई बड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लिया।
भविष्य की योजना
उन्होंने जानकारी दी कि अप्रैल से जून के बीच 15 से 21 दिनों के 75 विशेष प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाएंगे। साथ ही संगठन को और प्रभावी ढंग से चलाने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की योजना भी बनाई गई है। वर्तमान में 45 प्रांतों की व्यवस्था है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 80 से अधिक संभागों में बदलने की तैयारी की जा रही है, ताकि कार्य विस्तार को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।