Enhancing Maritime Security: भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने बेंगलुरु स्थित कंपनी के साथ उन्नत क्षमता वाले ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम जैमर्स की खरीद के लिए समझौता किया है। इस परियोजना का उद्देश्य नौसेना के जहाजों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताओं से लैस करना और समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा को और प्रभावी बनाना है।
स्वदेशी तकनीक को मिलेगा बढ़ावा
यह खरीद ‘भारतीय-स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित’ श्रेणी के तहत की जा रही है। परियोजना में उपयोग होने वाले अधिकांश उपकरण देश में ही तैयार किए जाएंगे, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल घरेलू रक्षा उद्योग को नई तकनीकी क्षमताएं विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी।
क्या है GNSS जैमर की भूमिका
GNSS जैमर एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है, जिसका उपयोग उपग्रह आधारित नेविगेशन संकेतों को बाधित या नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। यह तकनीक विरोधी पक्ष के नेविगेशन और लोकेशन सिस्टम की प्रभावशीलता को कम कर सकती है। इसके माध्यम से सैन्य प्लेटफॉर्म जटिल और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अधिक सुरक्षित ढंग से संचालन कर सकते हैं।
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समुद्री अभियानों में बढ़ेगी सुरक्षा
नई प्रणाली नौसेना के जहाजों को ऐसे वातावरण में बेहतर सुरक्षा प्रदान करेगी, जहां इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप या नेविगेशन संबंधी खतरे मौजूद हों। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक समुद्री अभियानों में इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है और ऐसी प्रणालियां जहाजों की सुरक्षा तथा मिशन की सफलता में अहम भूमिका निभाती हैं।
रक्षा आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम
रक्षा मंत्रालय का यह निर्णय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और तकनीकी सुदृढ़ीकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्नत प्रणालियों की खरीद से नौसेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। साथ ही यह पहल देश में विकसित रक्षा तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।