लखनऊ । प्रदेश सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ग्रामीण और अर्ध शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बनाने के उद्देश्य से राज्य के सभी 975 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों; सीएचसी के लिए सरकार ने 25 करोड़ रुपये का विशेष बजट जारी किया है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से इन स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच सुविधाओं की कमी, उपकरणों के पुराना हो जाने और संसाधनों की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। अब सरकार द्वारा जारी की गई इस धनराशि से न केवल इन केंद्रों की वर्तमान कमियों को दूर किया जाएगा बल्कि इन्हें आधुनिक तकनीक और पर्याप्त चिकित्सा सामग्री से भी सुसज्जित किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस 25 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सबसे पहले उन जांच सेवाओं को मजबूत किया जाएगा, जिनकी ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक जरूरत पड़ती है जैसे रक्तजांच, मूत्र जांच, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ब्लड शुगर टेस्ट, थायरॉयड जांच, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच और संक्रामक बीमारियों की जांच भी शामिल है।
अभी तक स्थिति यह रही है कि कई स्वास्थ्य केंद्रों में मशीनें तो मौजूद थीं, लेकिन उनका रखरखाव न होने की वजह से वे इस्तेमाल के योग्य नहीं रहीं। कई जगहों पर तकनीशियन या लैब असिस्टेंट न होने के कारण जांच सेवाएं ठप पड़ी रहती थीं। सरकार का नया बजट ऐसे सभी केंद्रों में जांच सेवाओं को निर्बाध रूप से चलाने के लिए आवश्यक मानव संसाधन और उपकरणों को उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
डिजिटल सिस्टम भी होगा बेहतर
प्रदेश सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह धनराशि सिर्फ उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं होगी बल्कि इससे लैब की गुणवत्ता बढ़ाने, बिजली और पानी जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं को मजबूत करने, ठंडे तापमान में दवाओं के संरक्षण के लिए कोल्ड चेन सिस्टम को सुधारने और मरीजों के रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए डिजिटल सिस्टम को भी बेहतर बनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अगर जांच सुविधाएं मजबूत होंगी, तो मरीजों को छोटी-छोटी जांचों के लिए जिला अस्पतालों तक जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे एक ओर बड़ी संख्या में मरीजों की भीड़ जिला अस्पतालों पर कम होगी तो दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और दूर दराज के लोग बिना अतिरिक्त खर्च के अपने स्वास्थ्य की बेहतर जांच करा सकेंगे।
गंभीर बीमारियों को होगा जोखिम कम
सरकार के इस प्रयास को स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सकारात्मक कदम बता रहे हैं। उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसा विशाल और जनसंख्या की दृष्टि से बड़ा राज्य तभी स्वास्थ्य के क्षेत्र में मजबूत बन सकता है। जब आधारभूत स्वास्थ्य ढांचा यानी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सशक्त हों। क्योंकि इन्हीं केंद्रों पर सबसे पहले आम जनता इलाज के लिए पहुंचती है। यदि यहां आधारभूत जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो इलाज भी समय पर शुरू किया जा सकेगा जिससे गंभीर बीमारियों का जोखिम कम हो जाएगा। इससे मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, एनीमिया जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद मिलेगी।
जांच सुविधा से लैस होंगे केंद्र
इस बजट को स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की सरकार की व्यापक योजना का हिस्सा भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में नए स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, डॉक्टरों की भर्ती, एंबुलेंस नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के तहत ई रिकॉर्ड सिस्टम को लागू करने जैसे कदम उठाए गए हैं। अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर जांच सुविधाओं से लैस करना इस प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण है।
बजट से गुणवत्ता में सुधार
कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 975 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए जारी किया गया 25 करोड़ रुपये का बजट ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और आवश्यक कदम माना जा रहा है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और प्रदेश के आम नागरिकों को एक अधिक विश्वसनीय, सुलभ और आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली का लाभ मिल सकेगा। यह कदम आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।