
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर बड़ा सियासी दांव खेल दिया है. पार्टी ने 71 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है और इसमें 9 मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया गया है, जिनमें से 5 मंत्री पद संभाल चुके हैं. इस लिस्ट ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है. सबसे बड़ा झटका विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, पूर्व मंत्री रामप्रीत पासवान, रामसूरत राय, अमरेंद्र सिंह और मोतीलाल प्रसाद जैसे वरिष्ठ नेताओं को लगा है. पार्टी ने इस बार कई नई और युवा चेहरों पर भरोसा जताया है, जिससे विपक्ष के खेमे में बेचैनी बढ़ गई है.
BJP का फोकस युवा और नए चेहरों पर
रीगा से पूर्व मंत्री मोतीलाल प्रसाद की जगह बैद्यनाथ प्रसाद, जबकि मुंगेर से विधायक प्रणव कुमार की जगह कुमार प्रणय को टिकट दिया गया है. इसी तरह सीतामढ़ी सीट से मिथिलेश कुमार की जगह सुनील पिंटू को उम्मीदवार बनाया गया है. खास बात ये है कि सुनील पिंटू पहले बीजेपी में थे, बाद में जदयू में गए और सांसद बने. अब वे फिर से बीजेपी में लौटकर विधानसभा मैदान में उतरेंगे. पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार जनता और संगठन के बीच तालमेल पर आधारित टिकट बंटवारा हुआ है.
महिला समीकरण पर BJP की नजर
राजनगर सुरक्षित सीट से पूर्व मंत्री रामप्रीत पासवान की जगह सुजीत पासवान को उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं नरपतगंज सीट से जयप्रकाश यादव की जगह देवयंती यादव को टिकट मिला है, जो पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी हैं. अजय निषाद हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे. इसी तरह औराई सीट से पूर्व मंत्री रामसूरत राय की जगह रमा निषाद को उतारा गया है.बीजेपी का ये कदम साफ दिखाता है कि पार्टी अब महिला नेताओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर खास ध्यान दे रही है.
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नए की एंट्री से बदला समीकरण!
कटोरिया सुरक्षित सीट से निक्की हेंब्रम की जगह पूरनलाल टुडू को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि कुम्हरार सीट से 20 साल से विधायक रहे अरुण सिन्हा का टिकट काटकर संजय गुप्ता को मौका दिया गया है. वहीं सबसे बड़ा बदलाव पटना साहिब सीट पर हुआ है जहां मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, जो 30 साल से विधायक थे, उनकी जगह रत्नेश कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया गया है. इसके अलावा आरा सीट से 78 वर्षीय पूर्व मंत्री अमरेंद्र सिंह की जगह संजय टाइगर को टिकट मिला है. जानकारों की मानें तो बीजेपी ने इस लिस्ट के जरिए साफ संदेश दिया है कि अब संगठन और जनता की पसंद ही असली पहचान होगी. पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों को उतारना ये दिखाता है कि पार्टी युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संतुलन को लेकर नई रणनीति बना रही है. इस बड़े बदलाव से जहां विपक्षी दल सकते में हैं, वहीं बीजेपी का कार्यकर्ता वर्ग नए उत्साह में दिख रहा है.