Asian Games 2026: जापान के आइची-नागोया में एशियन गेम्स 2026 का आगाज हो चुका है। भारत के सैकड़ों खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में पदक जीतने की उम्मीद के साथ उतरे हैं। क्रिकेट में भी भारतीय पुरुष और महिला टीम को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। लेकिन खेल शुरू होने से पहले एक नया सवाल चर्चा में है। सवाल यह है कि अगर मेडल समारोह में एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी मौजूद रहे तो क्या भारतीय टीम उनके हाथों से मेडल लेगी?
एशिया कप से शुरू हुआ था विवाद
यह चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि पिछले दो बड़े मौकों पर ऐसा विवाद सामने आ चुका है। 2025 में भारतीय पुरुष टीम ने एशिया कप जीता था, जबकि 2026 में भारतीय महिला टीम भी एशिया कप चैंपियन बनी। दोनों बार ACC अध्यक्ष मोहसिन नकवी ट्रॉफी देने पहुंचे थे। रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय टीमों ने उनके हाथों से ट्रॉफी नहीं ली थी। इसके बाद यह मामला खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया।
एशियन गेम्स में क्यों उठ रहा सवाल?
एशियन गेम्स में क्रिकेट प्रतियोगिता के आयोजन में ACC की भी भूमिका रहती है। ऐसे में अगर क्रिकेट स्पर्धा के मेडल समारोह में किसी एशियाई क्रिकेट अधिकारी को जिम्मेदारी दी जाती है तो मोहसिन नकवी का नाम सामने आ सकता है। इसी संभावना को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या एशिया कप जैसा विवाद फिर देखने को मिल सकता है।
BCCI ने फिलहाल नहीं दिया स्पष्ट जवाब
जब BCCI सचिव देवजित सैकिया से इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम और बोर्ड का पूरा ध्यान प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन करने और पदक जीतने पर है। उनके अनुसार भविष्य की किसी संभावित स्थिति पर अभी टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। इससे साफ है कि बोर्ड ने अभी कोई सार्वजनिक रुख सामने नहीं रखा है।
मेडल कौन बांटता है?
एशियन गेम्स में पदक वितरण की मुख्य जिम्मेदारी एशियाई ओलंपिक परिषद (OCA) की होती है। OCA अध्यक्ष अलग-अलग खेलों के लिए विभिन्न अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंप सकते हैं। कई बार संबंधित खेल महासंघों के प्रमुख भी मेडल समारोह का हिस्सा बनते हैं। क्रिकेट में ऐसी स्थिति बनने पर ACC अध्यक्ष की भूमिका संभव हो सकती है, हालांकि अंतिम फैसला OCA के अधिकार क्षेत्र में आता है।
मेडल लेने से इनकार करना आसान नहीं
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि एशियन गेम्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मेडल समारोह के नियम बेहद सख्त होते हैं। खिलाड़ियों को पदक, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना अनिवार्य होता है। किसी भी प्रकार के विरोध या विवादास्पद कदम पर कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए फिलहाल यह पूरा मामला सिर्फ संभावनाओं और चर्चाओं तक सीमित है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि अगर ऐसी स्थिति बनती है तो भारतीय टीम और खेल प्रशासक क्या फैसला लेते हैं।