UP News: यूपी के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अब पढ़ाई का मतलब सिर्फ पाठ्यक्रम रटना या पूरा करना नहीं रहा। आईआईटी गांधीनगर के सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) के सहयोग से शुरू किए गए 'क्यूरियोसिटी प्रोग्राम' ने इन स्कूलों की बालिकाओं की शिक्षा को नया आयाम दिया है। इस कार्यक्रम का फोकस छात्राओं में सवाल पूछने की आदत, तर्क करने की क्षमता और वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर है।
विज्ञान को बनाया जा रहा मजेदार
हैंड्स-ऑन एक्टिविटी, रोचक खिलौनों और मॉडलों के जरिए विज्ञान को मजेदार बनाया जा रहा है, जिससे वंचित वर्ग की इन बेटियों में स्टेम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमेटिक्स) के प्रति रुचि जाग रही है। यह कार्यक्रम 2022 में समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए), प्रदेश सरकार और आईआईटी गांधीनगर के बीच सहयोग से शुरू हुआ था। शुरुआत में यह राज्य के 746 केजीबीवी स्कूलों तक सीमित था, जहां करीब 75 हजार बालिकाएं पढ़ती हैं। लेकिन अब यह विस्तारित होकर 12 राज्यों के 2,586 केजीबीवी स्कूलों में चल रहा है, जिसमें 2 लाख से अधिक लड़कियां शामिल हैं।
प्रोग्राम की विशेषता है 100 विशेष मॉड्यूल्स का विकास
प्रदेश में यह कार्यक्रम विशेष रूप से प्रभावी साबित हो रहा है, जहां पिछड़े और वंचित समुदायों की लड़कियां आवासीय सुविधा के साथ शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। प्रोग्राम की मुख्य विशेषता है 100 विशेष मॉड्यूल्स का विकास, जो मिडिल स्कूल स्तर के विज्ञान को अनुभवात्मक तरीके से सिखाते हैं। ये मॉड्यूल हिंदी में तैयार किए गए हैं, ताकि छात्राएं आसानी से जुड़ सकें। कार्यक्रम तीन चरणों में लागू होता है। पहले ऑनलाइन वर्कशॉप, फिर हर स्कूल को 'क्यूरियोसिटी बॉक्स' उपलब्ध कराना, जिसमें आइंस्टीन क्लॉक, बैलेंसिंग बर्ड जैसे रोचक खिलौने और सामग्री होती है और अंत में ऑफलाइन फेस-टू-फेस वर्कशॉप। हाल ही में प्रयागराज जैसे जिलों में ये बॉक्स वितरित किए गए हैं, जिससे बालिकाएं खुद प्रयोग करके सीख रही हैं।
लडकियों में जाग रही विज्ञान के प्रति जिज्ञासा
आईआईटी गांधीनगर के सीसीएल प्रमुख मनीष जैन का कहना है कि यह कार्यक्रम इन लड़कियों के बैकग्राउंड को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। उदाहरण, कहानियां और भाषा सब कुछ स्थानीय संदर्भ से जुड़ा है। जिला कोऑर्डिनेटर शेत्रुंजय शर्मा ने फीडबैक दिया कि कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता यह है कि लड़कियों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा जाग रही है। शिक्षक भी ट्रेनिंग लेकर इन एक्टिविटी को क्लासरूम में लागू कर रहे हैं।केजीबीवी स्कूल मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के लिए हैं, जो शिक्षा से वंचित रह जाती हैं।
लडकियों का बढ रहा आत्मविश्वास
इस कार्यक्रम से न सिर्फ विज्ञान-गणित की समझ मजबूत हो रही है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। कई स्कूलों में लड़कियां अब खुद सवाल पूछती हैं, प्रयोग करती हैं और तर्क करती हैं जो पारंपरिक शिक्षा में कम देखने को मिलता था। समग्र शिक्षा उत्तर प्रदेश के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल लड़कियों को स्टेम फील्ड में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। 2023-24 में शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग सेशन भी आयोजित किए गए। कार्यक्रम का विस्तार अब मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों तक हो चुका है, लेकिन यूपी में इसका प्रभाव सबसे गहरा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी पहलें लड़कियों की शिक्षा में लैंगिक असमानता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। क्यूरियोसिटी प्रोग्राम न सिर्फ पढ़ाई को मजेदार बना रहा है, बल्कि इन बेटियों को भविष्य की वैज्ञानिक, इंजीनियर और इनोवेटर बनाने की दिशा में मजबूत कदम है। आने वाले समय में यह मॉडल पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है।