Physical Activity And Mood: हम सब अक्सर सुनते हैं कि एक्सरसाइज करने से मन फ्रेश और रिलैक्स हो जाता है। लेकिन अब एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय रिसर्च ने इस बात को वैज्ञानिक रूप से साबित भी कर दिया है। इस स्टडी में 8,000 से ज्यादा लोगों के करीब 3 लाख मूड रिपोर्ट्स का बारीकी से एनालिसिस किया गया। स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइस की मदद से यह पता लगाया गया कि आपके मूड और रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटी के बीच क्या सीधा कनेक्शन है। इस संबंध को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
मूड और फिजिकल एक्टिविटी एक दूसरे से जुड़े
स्टडी में पाया गया कि हमारा मूड और फिजिकल एक्टिविटी दोनों एक-दूसरे से सीधे जुड़े हैं। जब हम हल्की या डेली की एक्टिविटी करते हैं, तो हमारा मूड बेहतर होता है। वहीं इसके उलट, जब हम अंदर से खुश और अच्छा महसूस कर रहे होते हैं, तो हम खुद-ब-खुद ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं।
बढ़ जाता है एनर्जी लेवल
रिसर्च में पाया गया कि एनर्जी लेवल फिजिकल एक्टिविटी के साथ सबसे ज्यादा जुड़ा हुआ है। 95 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने रिपोर्ट किया कि जब वे एक्टिव रहते थे, उन्हें ज्यादा एनर्जी महसूस होती थी। अगर आपको थकावट या सुस्ती लग रही है, तो थोड़ा सा मूवमेंट आपके एनर्जी लेवल को तुरंत बूस्ट कर सकता है।
घर के काम भी मूड को बनाते हैं बेहतर
रिसर्च में साफ किया कि आपको जिम जाने या भारी एक्सरसाइज करने की जरूरत नहीं है। आपके रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम जैसे घर की सफाई करना, बालकनी या छत पर टहलना, या लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना भी आपके मूड को उतना ही बढ़िया बना देता है।
उदास लोगों के लिए फायदेमंद
रिसर्च के मुताबिक, जो लोग शुरुआत में कम खुश या लो-एनर्जी महसूस कर रहे थे, उन्हें हल्की फिजिकल एक्टिविटी से सबसे ज्यादा फायदा हुआ। इसका मतलब यह है कि थोड़ी सी चहल-पहल हर किसी का मूड तो बदलती ही है, लेकिन जो लोग उदास या कमजोर महसूस कर रहे हैं, उनके लिए यह ज्यादा फायदेमंद है।
कैसे हुई रिसर्च
आपको बता दें कि इस स्टडी में दुनिया भर के अलग-अलग लोगों के डेटा को शामिल किया गया। यह स्टडी दुनिया भर के 67 रिसर्च ग्रुप्स ने मिलकर की है। इसमें लोगों के स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच के डेटा की मदद ली गई, जिससे यह जानकारी मिल सकी कि किस समय, कौन सी एक्टिविटी, किस व्यक्ति के मूड पर कैसा असर डालती है। यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी के अनुसार सबसे सही जानकारी देती है।
रिसर्च अभी बाकी है
हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि मूवमेंट से मूड तो सुधरता है, लेकिन क्यों कुछ लोगों को ज्यादा फायदा होता है और कुछ को कम, यह अभी साफ नहीं है। इस पर अभी और रिसर्च होनी बाकी है। आगे शोधकर्ता यह जानने की कोशिश करेंगे कि व्यक्तिगत और पर्यावरणीय कारक कैसे इस संबंध को प्रभावित करते हैं।