आदेश कामरा, जिसे भारत का सबसे खौ़फनाक सीरियल किलर माना जाता है. अब तक 33 हत्याओं में शामिल रहा है और वर्तमान में भोपाल की सेंट्रल जेल में उम्रभर की सजा काट रहा है. अब उसका बेटा शुभम भी उसी राह पर चल पड़ा है. भोपाल में एक मामूली विवाद के चलते शुभम ने एक व्यक्ति की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी. तो आइए, शुभम की इस करतूत से पहले हम आपको उसके पिता आदेश खामरा की पूरी कहानी बताते हैं।
यूपी के सुल्तानपुर का है रहने वाला
आदेश उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले का निवासी है. मध्य प्रदेश के मंडीदीप में एक दर्जी के रूप में काम करता था. दिन में वह सिलाई का काम करता और रात में ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों को नशीला भोजन खिलाकर उनकी हत्या करता. इसके बाद वह शवों को सुनसान इलाकों में फेंक देता और लूटी गई चीजों को बिहार और उत्तर प्रदेश में बेच देता.
'मोक्ष' के नाम पर कत्ल
पुलिस ने बताया कि उसने इस अपराध में अपने साथी जयकरण प्रजापति के साथ मिलकर कई हत्याएं कीं. वह इन हत्याओं को 'मोक्ष' देने के रूप में देखता था, क्योंकि उसका मानना था कि ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी कठिन होती है. आदेश खामरा को 2018 में गिरफ्तार किया गया और वह भोपाल की सेंट्रल जेल में उम्रभर की सजा काट रहा है. उसने आठ सालों में 34 लोगों की हत्या की. वह वर्तमान में भोपाल की सेंट्रल जेल में बंद है और उम्रभर की सजा काट रहा है.
तंबाकू खाकर देता था जवाब
आदेश खामरा की गिरफ्तारी के बाद, पुलिस ने उससे पूछताछ की. पूछताछ के दौरान, वह तंबाकू खाकर पुलिस को जवाब देता था, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और अपराधों के प्रति उसका दृष्टिकोण स्पष्ट हुआ. उसकी यह आदत उसकी कठोरता और अपराधों के प्रति उसके नज़रिए को दर्शाती है. आदेश खामरा ने अपनी गिरफ्तारी के बाद 33 हत्याओं को कबूल किया था, जो उसने ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों को निशाना बनाकर की थीं.
कत्ल के बाद नहीं मिलता था सुराग
साल 2010 में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में ट्रक ड्राइवरों और उनके सहायकों की हत्याओं की एक श्रृंखला शुरू हुई. मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में लावारिस शव मिलने लगे, जिनमें एक समानता थी—सभी शिकार ट्रक ड्राइवर या उनके सहायक थे. पुलिस के लिए यह एक पहेली बन गई थी, क्योंकि इन हत्याओं के पीछे कोई स्पष्ट सुराग नहीं था.
हत्याओं का यह सिलसिला आठ वर्षों तक जारी रहा और पुलिस एक राज्य से दूसरे राज्य तक भटकती रही, लेकिन कातिल का कोई पता नहीं चला. हाईवे पर सीसीटीवी कैमरों की कमी और पुलिस की सीमित संसाधनों के कारण अपराधी आसानी से बच निकलते थे.
यह स्थिति तब बदल गई जब भोपाल के बिलखिरिया इलाके में एक ट्रक ड्राइवर की लाश मिली. इस बार पुलिस को मौके से एक संदिग्ध व्यक्ति मिला, जिसने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया. उसने बताया कि इन हत्याओं के पीछे एक गैंग है, जिसका सरगना भोपाल का एक दर्जी है—आदेश कामरा. इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और आदेश कामरा को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के बाद उसने 33 हत्याओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया.
सीरियल किलर का खुल गया राज
आदेश, जो दिन में एक साधारण दर्जी का काम करता था, रात में ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों को निशाना बनाता था. वह उन्हें नशीला भोजन खिलाकर बेहोश करता और फिर उनकी हत्या कर देता. इसके बाद वह शवों को सुनसान इलाकों में फेंक देता और लूटी गई संपत्ति को बिहार और उत्तर प्रदेश में बेच देता था. पुलिस की जांच में यह सामने आया कि आदेश खामरा ने 2010 से 2018 के बीच छह राज्यों में 33 हत्याओं को अंजाम दिया. उसने इन हत्याओं को गैंग के साथ मिलकर किया था, जिसमें वह ट्रक ड्राइवरों और हेल्परों से पहले किसी ढाबे पर मिलकर दोस्ती करते थे, फिर उनकी हत्या कर लूट लेते थे. हत्या के बाद ट्रक का सामान ले जाकर बाजार में बेचते थे.
आदेश को 2018 में रायसेन के माखन सिंह ट्रक ड्राइवर की हत्या के बाद गिरफ्तार किया गया. जांच आगे बढ़ी तो में आदेश के साथी जयकरण को दबोच लिया गया. इसके बाद आदेश सहित 9 गिरफ्तारियां हुई. आदेश को सुल्तानपुर के जंगलों से गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में उसने 33 हत्याओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया.
भोपाल पुलिस की गिरफ्त में आया आदेश
भोपाल पुलिस के लिए आदेश की गिरफ्तारी एक चुनौतीपूर्ण कार्य था. एसपी बिट्टू शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने तीन दिनों तक सुलतानपुर के जंगलों में पीछा किया. अंततः, 7 सितंबर 2018 को पुलिस ने आदेश खामरा को गिरफ्तार किया. पूछताछ में उसने 33 हत्याओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की.
चाचा को मानता था गुरू
उसकी इस अपराधी जीवनशैली के पीछे एक व्यक्ति का हाथ था—उसका मुंहबोला चाचा, जिसे वह अपना 'गुरु' मानता था. यह व्यक्ति अशोक खांबरा, 1980 के दशक में एक कुख्यात ट्रक लूट गिरोह का सरगना था. आदेश ने अशोक से ही अपराध की दुनिया के गुर सीखे थे—कैसे वारदातें अंजाम देनी हैं, पुलिस को कैसे चकमा देना है, और सबूतों को कैसे नष्ट करना है.
अशोक खांबरा की दहशत का आलम यह था कि वह जिस ट्रक पर नजर डालता, वह ट्रक उसी का हो जाता था. आदेश ने भी उसी शैली को अपनाया और ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों को निशाना बनाकर 33 हत्याओं को अंजाम दिया. इतना ही नहीं, वह इन हत्याओं को फिल्मी स्टाइल में अंजाम देता था, जिससे उसके आसपास के लोग भी नहीं समझ पाते थे कि वह एक खौ़फनाक अपराधी है. भोपाल के मंडीदीप इलाके में उसके खिलाफ कोई संगीन अपराध का मामला दर्ज नहीं था, केवल एक मामूली मारपीट का केस था. इस तरह आठ वर्षों तक वह पुलिस को चकमा देता रहा और अपनी हत्याओं का सिलसिला जारी रखा.
बेटे की खूनी करतूत
भोपाल के मिसरोद इलाके में एक शराब कंपनी में काम करने वाले कृपाराम राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी गई. पुलिस के अनुसार, रविवार रात मंडीदीप के एक पुल के पास हुई इस वारदात में आरोपी शुभम खामरा और उसके चार साथियों ने कृपाराम को लाठियों और डंडों से पीट-पीटकर उसकी जान ले ली. वारदात का कारण शराब कंपनी में किसी काम को लेकर हुई बहस बताई जा रही है. बताया जाता है कि बहस के दौरान कृपाराम ने शुभम को थप्पड़ मार दिया था, जिससे गुस्साए शुभम ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस जघन्य हत्या को अंजाम दिया. पुलिस ने मामला दर्ज कर शुभम खामरा को गिरफ्तार किया है.